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रघुराम राजन को हटाने पर भाजपा को शिवसेना ने घेरा, बोली- जिसे अक्षम बताया, वही नोबेल को नामित हुआ

सेना के मुखपत्र 'सामना' में नोटबंदी से जुड़ा संपादकीय छपा है। उसमें लिखा है कि आम आदमी को नोटबंदी से काफी कुछ झेलना पड़ा है।"
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक संपादकीय के जरिए केंद्र सरकार पर हमला बोला है। सेना ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को हटाने के लिए सरकार की कड़ी निंदा की है।

शिवसेना ने नोटबंदी को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। सेना ने कहा है कि भाजपा के मंत्रियों की इस मसले पर अलग-अलग राय थी। सेना की इस तीखी प्रतिक्रिया से एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नोटबंदी से गरीब तबका बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में इससे जुड़ा एक संपादकीय छपा है। उसमें लिखा है कि “आम आदमी को नोटबंदी से काफी कुछ झेलना पड़ा है। यह बात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी मानी है। हम गडकरी की बात गंभीरता से लेते हैं। वह अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उसी समय पर अरुण जेटली का इस पर अलग मत था।”

आगे उसमें लिखा है कि सिर्फ पार्टी का प्रवक्ता ही साफ कर सकता है कि किसके बयान को सच के तौर पर लिया जाए। दावा किया गया कि सरकार ने नोटबंदी के विफल होने की बात कबूलने से मना कर दिया, जिसे कई राजनेताओं ने स्वीकारा। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन भी उन लोगों में शामिल थे। सेना के मुताबिक, नोटबंदी को लेकर सवाल करने से राजन को हटा दिया गया। लेख में लिखा है कि उन्हें एक वक्त पर लालची और अक्षम आर्थिक विशेषज्ञ बताया गया। मगर बाद में उसी शख्स को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया।

राजन को गद्दी से हटाने के लिए सेना ने पार्टी की निंदा भी की। दावा किया गया कि नोटबंदी कालाधन सफेद करने के लिए और अमीर लोगों को और अमीर बनाने का एक षडयंत्र थी। गडकरी ने कबूला कि आम लोगों को नोटबंदी से दिक्कत हुई, इसके लिए सेना ने उन्हें बधाई दी। आगे कहा कि उनका ऐसा करना देश की गरीब जनता के समर्थन में खड़ा होना है।

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