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पश्चिम बंगाल चुनाव में उतरेगी शिवसेना- संजय राउत का ऐलान, बीजेपी को हो सकती है मुश्किल

बताया जाता है कि ममता बनर्जी और शरद पवार भी लगातार संपर्क में हैं। पवार चाह रहे हैं कि सभी विपक्षी दल एक होकर लड़ें, ताकि भाजपा को कड़ी हार दी जा सके।

shivsena, Sanjay Rautसंजय राउत। फाइल फोटो। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के लिए बीजेपी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन उसके सामने चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। कभी उसकी साथी रही शिवसेना ने ऐलान किया है कि वह भी पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी। बताया जाता है कि ममता बनर्जी और शरद पवार भी लगातार संपर्क में हैं। पवार चाह रहे हैं कि सभी विपक्षी दल एक होकर लड़ें, ताकि भाजपा को कड़ी हार दी जा सके। हालाँकि, वामपंथी पार्टियों ने साफ किया है कि वे कांग्रेस के साथ लड़ेंगी। यह खबर भी बीजेपी के लिए नुक़सानदेह ही है।

शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने रविवार को कहा कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा लड़ने का निर्णय किया है। राउत ने कहा कि चुनाव लड़ने का यह निर्णय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ चर्चा करने के बाद किया गया। राउत ने ट्वीट किया, ‘‘एक बहुप्रतीक्षित जानकारी है। पार्टी प्रमुख श्री उद्धव ठाकरे के साथ चर्चा के बाद शिवसेना ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय किया है। हम जल्द ही कोलकाता पहुंच रहे हैं…। जय हिंद, जय बांग्ला।’’ उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि शिवसेना पश्चिम बंगाल में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव इस वर्ष अप्रैल-मई में होने की संभावना है। शिवसेना महाराष्ट्र में राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में है। तीनों दलों ने महा विकास आघाडी गठबंधन बनाया है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस और माकपा नीत वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं की रविवार को बैठक हुई। इस बैठक में में सीटों के बंटवारे और चुनाव की अन्य तैयारियों पर चर्चा हुई। 2016 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों ने गठबंधन किया था और 294 सदस्यीय विधानसभा में 76 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर चौधरी ने बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों के बीच सीटों के बंटवारे पर वार्ता इस महीने के अंत तक चलेगी। लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी ने कहा, ‘‘हम साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमत हुए हैं। हमारे बीच सकारात्मक चर्चा हुई और कोई असहमति नहीं है।’’

बता दें कि इससे पहले शिवसेना ने बिहार विधानसभा चुनाव में भी मैदान में उतरी थी। शिवसेना ने बिहार चुनाव में 22 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से 21 उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट मिले थे। शिवसेना के सभी 22 उम्मीदवारों को मात्र 20195 वोट ही मिले थे, जो कि कुल वोटों का 0.05 फीसदी था। वहीं, साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी शिवसेना उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। तब शिवसेना ने 73 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।

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