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समीत ठक्कर Shivsena का ताजा टारगेट! 6 महीने में 10 FIR दर्ज, CM उद्धव और सरकार को बदनाम करने के लगे हैं आरोप

शिवसेना के लीगल सेल के मुताबिक, ठाकरे या महाविकास अघाड़ी गठबंधन के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने वालों में ज्यादातर भाजपा समर्थक ही निकलते हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | Updated: November 1, 2020 9:40 AM
Maharashtra, CM Uddhav Thackerayमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे। (एक्सप्रेस फोटो)

महाराष्ट्र में पिछले साल शिवसेना के नेतृत्व में बनी महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार के पक्ष में अब तक भले ही ज्यादा चीजें न घटी हों, पर विपक्ष की आवाज जरूर मजबूत हुई है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी ने इस आलोचना को काम में सुधार लाने के बजाय आलोचकों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसमें हालिया नाम नागपुर में गिरफ्तार किए गए भाजपा समर्थक सोशल मीडिया यूजर समीत ठक्कर का जुड़ा है।

हालांकि, समीत ठक्कर एकमात्र ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और सरकार की आलोचना के लिए एफआईआर दर्ज हुई है। द प्रिंट वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीने में शिवेसना के लीगल सेल ने महाविकास अघाड़ी सरकार और उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने के मामलों में कई बार मुंबई पुलिस का दरवाजा खटखटाया। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अब तक 10 एफआईआर में कम से कम 50 आरोपी, जिनमें आम लोग और सोशल मीडिया अकाउंट्स शामिल हैं, उनके नाम भी पुलिस शिकायत में शामिल किए गए हैं।

माना जा रहा है कि शिवसेना की इस कड़ी कार्रवाई की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा के लिए एक बार फिर मौका पैदा हो गया है। शिवसेना के लीगल सेल के प्रमुख धर्मेंद्र मिश्र के मुताबिक, ठाकरे या महाविकास अघाड़ी गठबंधन के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने वालों में ज्यादातर भाजपा समर्थक ही निकलते हैं। हालांकि, भाजपा का कहना है कि शिवसेना आलोचकों का मुंह बंद कराने के लिए अब ताकत के गलत इस्तेमाल में जुट गई है।

बता दें कि शिवसेना की आलोचकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का सिलसिला अप्रैल में शुरू हुआ। नवी मुंबई के एक व्यक्ति परेश बोरसे पर सीएम उद्धव और उनके बेटे आदित्य ठाकरे की एक फोटो शेयर करने के लिए केस किया गया। इसमें बोरसे ने कोरोना को लेकर तंज कसा था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने बोरसे को सीएम और आदित्य की फोटो से छेड़छाड़ करने के लिए गिरफ्तार किया था। जहां बोरसे का केस सोशल मीडिया पर चर्चित नहीं हुआ, वहीं अगस्त में एक केस ने काफी लाइमलाइट बटोरी थी।

यह केस था ट्विटर पर खुद को स्वयंसेविका और गौरवशाली हिंदू लिखने वाली सुनैना होली का, जिन्हें मुंबई साइबर पुलिस ने ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक बयान और शांति भंग करने वाले मैसेज के लिए अरेस्ट किया था। पुलिस के मुताबिक, होली को दो नवंबर को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स साइबर पुलिस सेल के सामने पेश होना है। उनकी कोर्ट में 23 नवंबर को सुनवाई भी होनी है।

अगस्त में ही एक शिवसेना सदस्य ने यूट्यूबर साहिल चौधरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि साहिल ने सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े केस की जांच पर आदित्य ठाकरे पर आपत्तिजनक पोस्ट किया था। साहिल को मुंबई पुलिस ने एक वीडियो में महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहीं, अक्टूबर की शुरुआत में पुलिस ने दिल्ली निवासी वकील विभोर आनंद को सुशांत केस में झूठे षड़यंत्र की थ्योरी निकालने के लिए अरेस्ट किया था। एक और शिकायत यूट्यूब चैनल भैया तिवारी के खिलाफ भी दर्ज हुई थी।

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