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CM उद्धव ठाकरे ने रद्द किया फडणवीस का फैसला- RSS से जुड़े शोध संस्थान को स्टांप शुल्क में छूट देने से इनकार

एक अधिकारी ने इस पर बयान देते हुए कहा, ‘105 हेक्टेयर जमीन की खरीद के लिए 1.5 करोड़ रुपए के स्टांप शुल्क पर दी गई छूट को अब रद्द कर दिया गया है। संस्थान को अब स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा।’

Author मुंबई | Updated: December 5, 2019 5:37 PM
महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे। (PTI Photo)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आरएसएस (RSS) से संबंध रखने वाले नागपुर (Nagpur) के एक शोध संस्थान को स्टांप शुल्क से छूट देने की भाजपा सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। एक अधिकारी ने गुरुवार (05 दिसंबर) को बताया कि यह फैसला उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (MVA) सरकार ने बुधवार (04 दिसंबर)को लिया था। सरकारी अधिकारी ने बताया कि नागपुर के रिवाइवल रिसर्च इंस्टिट्यूट ने वहां करोल तहसील में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है। बता दें कि 50-50 सीएम वाले फॉर्मूले के आधार पर सरकार बनाने के लिए बीजेपी मानने से इनकार कर दिया था जिससे गुस्साई शिवसेना सरकार संभालने के बाद इस तरह के कदम उठाते दिख रही है।

पंजीकरण शुल्क पर मिली छूट को शिवसेना ने हटायाः बता दें कि संस्थान की स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा भारतीय शिक्षण मंडल ने की थी। नौ सितंबर को देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली तत्कालीन राज्य सरकार ने संस्थान को इस जमीन के सौदे के लिए स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क के भुगतान से छूट भी दी थी। लेकिन शिवसेना की सरकार आते ही इस छूट पर रोक लगाकर इसे खत्म कर दिया है।

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105 हेक्टेयर वाले जमीन की खरीद पर देने होंगे शुल्कः मामले में अधिकारी ने कहा, ‘105 हेक्टेयर जमीन की खरीद के लिए 1.5 करोड़ रुपए के स्टांप शुल्क पर दी गई छूट को अब रद्द कर दिया गया है। संस्थान को अब स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा।’ सूत्रों ने इससे पहले बताया था कि राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक बुधवार (04 दिसंबर) को हुई जहां देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) नीत पूर्व सरकार द्वारा अंतिम दिनों में लिए गए 34 फैसलों पर चर्चा की गई थी।

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शिवसेना-बीजेपी के बीच बढ़ती दरारेः बता दें कि राज्य में शिवसेना और बीजेपी के बीच लगातार दरारे बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में यह शिवसेना द्वारा स्टांप शुल्क से छूट को खत्म करने से कहीं न कहीं दोनों के रिश्ते और भी खराब होते दिख रहे हैं। राज्य में शिवसेना की 50-50 सीएम वाले फॉर्मूले को बीजेपी द्वारा नहीं मानने पर शिवसेना भड़क गई और बीजेपी को छोड़ अन्य विपक्षी पार्टियों से गठबंधन कर सरकार बना लिया।

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