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Delhi : शेल्टर होम में हैवानियत, सजा के नाम पर मासूम बच्चियों के प्राइवेट पार्ट में डालते थे मिर्च पाउडर

दिल्ली के द्वारका स्थित एक निजी शेल्टर होम में मासूम बच्चियों को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि बात न मानने और अनुशासन के नाम पर उनके प्राइवेट पार्ट्स में सार्वजनिक रूप से मिर्च पाउडर डाल दिया जाता था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली के द्वारका स्थित एक निजी शेल्टर होम में मासूम बच्चियों को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि बात न मानने और अनुशासन के नाम पर उनके प्राइवेट पार्ट्स में सार्वजनिक रूप से मिर्च पाउडर डाल दिया जाता था। इस मामले का खुलासा दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की विशेष जांच कमेटी ने किया। द्वारका के डीसीपी एंटो अल्फोंसे ने बताया कि द्वारका सेक्टर-23 थाना पुलिस ने शेल्टर होम के स्टाफ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की 6 धाराओं और जेजे एक्ट में केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच के दौरान कमेटी ने बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न होने, शारीरिक दंड दिए जाने, घरेलू कामकाज कराने और खराब खाना मिलने की बात कही है।

दो बच्चियों ने किया खुलासा : डीसीडब्ल्यू की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने बताया, ‘‘जब हम शेल्टर होम में मौजूद बच्चियों से बात कर रहे थे तो उनमें से दो बच्चियां काफी डरी हुई थीं। काफी देर तक काउंसिलिंग करने के बाद उन्होंने हमें बताया कि किसी गलती की सजा देने के लिए शेल्टर होम का स्टाफ उनके प्राइवेट पार्ट में सार्वजनिक रूप से मिर्च पाउडर डाल देता है।’’

बच्चियों से कराया जाता था घरेलू कामकाज : शेल्टर होम में काफी समय से रह रही बच्चियों ने बताया कि उनके कमरे-टॉयलेट साफ कराने और कपड़े-बर्तन धुलवाने जैसे घरेलू काम भी कराए जाते हैं। मालीवाल के मुताबिक, एक लड़की ने बताया कि अगर उनसे बिस्तर पर कपड़े छूटने जैसी गलती होती है तो स्टाफ लकड़ी या स्केल से 6-7 बार उनकी पिटाई करता है।

बच्चियों को दूसरी जगह नहीं किया जाएगा शिफ्ट : द्वारका स्थित इस शेल्टर होम में 6 से 15 साल की 22 बच्चियां रह रही हैं। कमेटी की जांच के बाद मालीवाल ने गुरुवार रात शेल्टर होम का निरीक्षण किया और पुलिस को मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया, ‘‘इस बारे में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री को भी सूचना दे दी गई है। फिलहाल हमारे काउंसलर हर वक्त शेल्टर होम में रुके हुए हैं। वहीं, सादी वर्दी में पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। फिलहाल बच्चियों को दूसरे शेल्टर होम में शिफ्ट करने पर विचार नहीं किया गया है, क्योंकि यह गैर जरूरी है। वहीं, कुछ बच्चियां नजदीक स्थित स्कूलों में पढ़ने जाती हैं। दूसरी जगह शिफ्ट करने पर उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।’’

 

अच्छा खाना भी नहीं मिलता था शेल्टर होम में : कमेटी की एक सदस्य ने बताया, ‘‘इस शेल्टर होम में स्टाफ की कमी भी है। ऐसे में पुरानी लड़कियों को जबरन नई लड़कियों की देखभाल में लगा दिया जाता था। यहां सिर्फ एक ही कुक है और बच्चों ने खाने की क्वॉलिटी खराब होने की शिकायत भी की है। वहीं, उन्हें वक्त पर खाना नहीं मिलता था।’’ बता दें कि पूर्वी दिल्ली स्थित एक शेल्टर होम से दिसंबर में ही 9 महिलाएं लापता हो गई थीं। इसके बाद डीसीडब्ल्यू ने शेल्टर होम्स की जांच शुरू की। यह टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक एक्सटर्नल एजेंसी है, जिसने मुजफ्फरनगर शेल्टर होम स्कैंडल का खुलासा किया था।

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