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चुनाव लड़ना है या लड़वाना यह तो वक्त की बात…

उत्तर प्रदेश में नौ अक्तूबर तक चल रही कांग्रेस की यात्राओं के बीच दिल्ली लौटीं दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश हर मामले में बेहाल है।

Author नई दिल्ली | September 23, 2016 1:43 AM

उत्तर प्रदेश में नौ अक्तूबर तक चल रही कांग्रेस की यात्राओं के बीच दिल्ली लौटीं दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश हर मामले में बेहाल है। गन्ना किसानों को कई सालों से भुगतान नहीं मिला है। युवक बेरोजगार हैं। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य बुरे हाल में है। सड़कें टूटी पड़ी हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद 27 साल में प्रदेश बर्बाद हो गया है। कांग्रेस का लक्ष्य उसे फिर से नंबर एक बनाना है। दिल्ली में बड़े पैमाने पर विकास कार्य करवाने के बावजूद यहां से पिछले दो चुनावों में कांग्रेस का सफाया होने पर दीक्षित कहती हैं कि लोग केजरीवाल की हवाई बातों पर यकीन कर बैठे और दिल्ली का बुरा दौर शुरू हो गया। अपने ऊपर दिल्ली जल बोर्ड के टैंकर घोटाले का मामला एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) में दर्ज होने को वे गंभीर बात नहीं मानती हैं।

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विधानसभा चुनाव नोएडा से लड़ने के सवाल पर दीक्षित ने कहा कि वे जहां जा रही हैं वहीं लोग चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दे रहे हैं। वे चुनाव लड़ेंगी या लड़ाएंगी यह अभी तय होना है। अभी तक तो यही तय है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। उसी तरह से तैयारी चल रही है। दीक्षित और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर प्रदेश के आधे-आधे जिलों में दौरा कर रहे हैं। इन यात्राओं में लोगों का उम्मीदों से अधिक समर्थन मिल रहा है। नौ अक्तूबर तक पूरे प्रदेश की यात्राएं पूरी हो जाएंगी। इसके बाद टिकट पर विचार किया जाएगा। उनके मुताबिक, देश में जातिवाद तो हर जगह है लेकिन उत्तर प्रदेश में हद से ज्यादा। इसके कारण सालों से चुनावों में विकास मुद्दा बना ही नहीं।

पार्टी के नेताओं के आपसी विवाद, पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से कुछ नेताओं के मतभेद आदि से जुड़े सवाल पर दीक्षित ने कहा कि यह सब तो होता रहता है। प्रशांत किशोर की भूमिका सीमित है उनसे किसी का भतभेद क्यों होगा?जनसत्ता से मुलाकात में दीक्षित ने कहा, ‘लोगों के बीच जाने पर लगा कि कांग्रेस ही जनता की समस्याओं का समाधान कर सकती है’। उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी जिम्मेदारी मिलते ही उनके निजामुद्दीन के घर पर लोगों की भीड़ लगने लगी है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में हर मोर्च पर पिछली सरकारें नाकाम रही हैं। पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। बिना रिश्वत कोई सरकारी काम नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक का बुरा हाल है। सड़कें इस कदर खराब हो गई हैं कि लोगों का उस पर चलना कठिन हो गया है।

कांग्रेस दिग्गज उमाशंकर दीक्षित की बहू के नाते उन्होंने अपनी ससुराल की सीट कन्नौज से 1984 का चुनाव जीता और राजीव गांधी की सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय की मंत्री बनीं। लेकिन 1989 के चुनाव में उसी कन्नौज से पराजित होने के बाद वे गुमनामी में चली गर्इं। उत्तर प्रदेश में बाहरी कहे जाने पर उनका कहना था कि अब यह सवाल नहीं किया जा रहा है। वैसे तो राजनीति ही यहीं से शुरू की थी। वे मानती हैं कि उन्हें दिल्ली के विकास कार्यों के कारण पार्टी ने मौका दिया है।

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