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शीला दीक्षित बोलीं – ‘कांग्रेस में बरसों तक हुई मेरी अनदेखी लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा’

पिछले दिनों शीला और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने एक साथ संवाददाता सम्मेलन किया। इन दोनों नेताओं को काफी समय बाद मंच साझा करते देखा गया।

Author नई दिल्ली | February 18, 2018 14:11 pm
शीला ने कहा कि हमें ध्यान रखना चाहिए कि आतंरिक राजनीति न हो।

आम आदमी पार्टी के हाथों दिल्ली में 2013 के चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद लगभग हाशिये पर चली गयी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पार्टी नेताओं को ‘आंतरिक राजनीति नहीं करने की’ नसीहत देते हुए अपने बारे में कहा कि बरसों तक उनकी अनदेखी की गयी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला ने ‘भाषा’ को दिये साक्षात्कार में किसी का नाम लिये बिना अपनी मन की व्यथा खोली है। शीला ने कहा कि मुझसे जो कहा जाता है वह मैं करती हूं। मैं कांग्रेस की हूं और कांग्रेस मेरी है। उन्होंने कहा कि बरसों तक पार्टी में मेरी अनदेखी की गई लेकिन मैंने कोई शिकायत नहीं की।

पिछले विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में नगर निगम सहित कई चुनाव और उपचुनाव हुए। लेकिन शीला दीक्षित को पार्टी का स्टार प्रचारक बनाये जाने के बावजूद प्रचार की कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी गयी। पिछले दिनों शीला और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने एक साथ संवाददाता सम्मेलन किया। इन दोनों नेताओं को काफी समय बाद मंच साझा करते देखा गया। इसके पीछे के घटनाक्रम के बारे में पूछने पर शीला ने कहा, ‘अचानक से यह जो प्रेस कांफ्रेस हुई, उससे पहले चार-पांच बार अजय माकन मेरे घर आए। वह बोले कि हम चाहते हैं कि आप साथ आएं।

शीला ने कहा, ‘ मेरे मन में कोई दुविधा नहीं है। हमें तो कांग्रेस के लिए काम करना है। किसी व्यक्ति विशेष के प्रति मन में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यही सोचकर गई कि वह पार्टी के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं। लेकिन जब चुनाव हुए तब उन्होंने मुझे एक बार भी नहीं बुलाया। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं को साथ में लेकर चलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि यदि सभी साथ नहीं चलेंगे तो नुकसान कांग्रेस का ही होगा। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पहली बार दिल्ली में कांग्रेस की जिम्मेदारी दी गयी तो पार्टी हाईकमान ने उनकी पसंद पूछी थी। उन्होंने कहा कि जो है सो है। किसी को बदलने की जरूरत नहीं है।

शीला ने कहा कि हमें ध्यान रखना चाहिए कि आतंरिक राजनीति न हो। दिल्ली के सिख नेता अरविन्दर सिंह लवली कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये थे। किंतु उन्होंने अपनी भूल का सुधार करते हुए कल ही कांग्रेस में वापसी कर ली। माना जाता है कि लवली शीला के काफी करीबी हैं। दिल्ली की आप सरकार की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर शीला ने कहा कि तीन साल हो गये हैं। या तो आप उनके इश्तेहार देखेंगे या खूब सारी बातें देखेंगे कि हमने ये कर दिया, हमनें वह कर दिया। लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अगर मैं दो उदाहरण दूं । वह कहते थे कि बिजली-पानी फ्री कर देंगे। किसी का बिजली-पानी फ्री नहीं किया।

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