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शीला दीक्षित ने पार्टी नेताओं को दी सलाह, मतभेद भुलाकर एकजुट हों दिल्ली के कांग्रेसी

प्रदेश अध्यक्ष पद से अजय माकन के इस्तीफे के बाद कांगेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा सूबे की बागडोर सौंपे जाने पर शीला ने कहा कि इस वक्त उनकी एक ही प्राथमिकता है कि पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को एक मंच पर खड़ा करना है और मिल-जुलकर लोकसभा के चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दलों का मुकाबला करना है।

Author January 14, 2019 8:31 AM
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को अब दिल्ली कांग्रेस की कमान सौंपी गई है।(पीटीआई फाइल फोटो)

अजय पांडेय

दिल्ली की नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने पार्टी नेताओं से कहा है कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हो जाएं और लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी को हराने में पूरी ताकत झोंक दें। अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी से किसी तरह के चुनावी गठजोड़ से इनकार करते हुए दीक्षित ने दावा किया कि कांग्रेस अपने दम पर दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन करेगी। प्रदेश अध्यक्ष पद से अजय माकन के इस्तीफे के बाद कांगेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा सूबे की बागडोर सौंपे जाने पर शीला ने कहा कि इस वक्त उनकी एक ही प्राथमिकता है कि पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को एक मंच पर खड़ा करना है और मिल-जुलकर लोकसभा के चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दलों का मुकाबला करना है। उन्होंने कहा कि सभी दलों में मतभेद होते हैं और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मतभेद हमारे यहां भी हैं, लेकिन इसका समाधान भी किया जा सकता है। ऐसे में वक्त की जरूरत यह है कि हम सभी पुराने मतभेद को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें।

भविष्य की प्राथमिकताओं के बारे में पूछने पर दीक्षित ने कहा कि फिलहाल तो उन्हें पूरे संगठन का अध्ययन करना है और जहां-जहां भी कमियां हैं उन्हें ठीक करना है। माकन के इस्तीफे के बाद और उनकी ताजपोशी से पहले बनाए गए ब्लॉक अध्यक्षों को लेकर उन्होंने कहा कि बेशक माकन ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन मेरी नियुक्ति से पहले वही अध्यक्ष थे। ऐसे में कोई भी नियुक्ति हुई है तो वह सही तरीके से हुई है। उसे लेकर कोई भी सवाल उठाना वाजिब नहीं है। मैं उन नियुक्तियों के साथ हूं। हां, ये जरूर है कि जहां पर अब भी नियुक्तियां होनी हैं, उनको लेकर सभी लोगों से राय-मशविरा किया जाएगा।

कांग्रेस संगठन में वैश्य, जाट, गुर्जर आदि समुदायों की उपेक्षा की बात पर दीक्षित ने कहा कि जाति के आधार पर इस तरह का वर्गीकरण उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके तीनों कार्यकारी अध्यक्ष बहुत अच्छे और अनुभवी हैं। हारून यूसुफ उनकी सरकार में लगातार मंत्री रहे, जबकि देवेंद्र यादव व राजेश लिलोठिया भी दो-दो बार विधायक रह चुके हैं। प्रदेश संगठन के विस्तार पर उन्होंने कहा कि पहले वह 16 जनवरी को कार्यभार संभाल लें, उसके बाद इन विषयों पर फैसला लिया जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी नजर में कोई दुश्मन नंबर वन या टू नहीं है। भाजपा केंद्र की सत्ता में है तो आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार चला रही है। ऐसे में कांग्रेस को दोनों दलों से मुकाबला करना है और उनकी अगुआई में पार्टी लोकसभा व दिल्ली विधानसभा चुनाव में इन दोनों दलों का डटकर सामना करेगी।

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