पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री और टीएमसी के वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास के खिलाफ लियोनल मेसी इंवेट विवाद की शुरुआती जांच के बाद बिधानपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। यह एफआईआर इवेंट के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता ने दर्ज कराई थी।
द इंडियन एक्सप्रेस ने मामले को लेकर इवेंट के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता से बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने अपनी साख बचाने के लिए चुनावों के पहले मुझे गिरफ्तार करवाया था। यह मामला बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में अरूप विश्वास और उनके साथियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
13 दिसंबर को आयोजित हुआ था कार्यक्रम
शिकायतकर्ता शताद्रु दत्ता ने 13 दिसंबर 2025 को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी की मौजूदगी वाला ‘GOAT India Tour – Kolkata Edition’ आयोजित किया था। शताद्रु दत्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तैयारियों के दौरान, TMC के तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने उन्हें धमकाया और उनसे जबरन वसूली की। अरूप बिस्वास ने कथित तौर पर उनसे बड़ी संख्या में फ्री टिकट और एक्रेडिटेशन कार्ड की मांग की।
दी गई थी कार्यक्रम रोकने की धमकी
इवेंट के मुख्य आयोजक ने दावा किया कि उसे धमकी भी दी गई थी कि अगर उसने बात नहीं मानी, तो इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को रोक दिया जाएगा। एफआईआर के मुताबिक, पूर्व खेल मंत्री और उनके साथियों ने आयोजकों से कथित तौर पर करीबन 22000 टिकट फ्री में लिए थे जिसे उन्होंने गलत तरीके से पैसा कमाने के लिए ब्लैक में बेच दिया।
शताद्रु दत्ता को इस कार्यक्रम से जुड़ी अनियमितताओं के सिलसिले में पहले गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन राज्य सरकार ने प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों को बचाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बना दिया।
‘मुझे बलि का बकरा बनाया गया’
शताद्रु दत्ता ने कहा, “उन्हें किसी की बलि चढ़ानी थी तो उन्होंने मुझे बलि का बकरा बना दिया गया। सरकार का इरादा अपने मंत्री को बचाना था, इसीलिए उन्हें शुरू में गिरफ्तार नहीं किया। लेकिन अगर आप लाइव वीडियो फुटेज और टूर से पहले की घटनाओं की टाइमलाइन देखें, तो यह पूरी तरह से जबरदस्ती वसूली थी। उन्होंने मुझ पर हर तरफ से दबाव डाला और 22,000 से अधिक टिकट ले लिए। उन्होंने अपनी दो नाबालिग भतीजियों और एक और रिश्तेदार को भी अधिकारी बताकर जबरन ग्राउंड के प्रतिबंधित इलाके में घुसा दिया, केवल मेसी के साथ फ़ोटो खिंचवाने के लिए। यह भी एक तरह की जबरदस्ती वसूली ही है।”
इवेंट के मुख्य आयोजक ने मंत्री द्वारा कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग और इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान स्थानीय सुरक्षा प्रोटोकॉल में हुई गंभीर चूक, दोनों की आलोचना की।
पुलिस से भी हुई चूक
शताद्रु ने कहा, “खेल मंत्री के साथ-साथ, पुलिस से भी भारी चूक हुई है। कानून से ऊपर कोई नहीं है। पुलिस को किसी भी मंत्री या उसके परिवार को अपनी राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके, अंतरराष्ट्रीय ‘Z-Plus’ सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने की इजाजत कभी नहीं देनी चाहिए थी। यह लियोनेल मेसी की सुरक्षा और राज्य की प्रतिष्ठा का मामला था।”
उन्होंने आगे कहा कि इस अफरा-तफरी की वजह से कार्यक्रम का शेड्यूल इतना अधिक बिगड़ गया जब मेसी वहाँ से निकले हुए सिर्फ पाँच मिनट ही हुए थे तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्टेडियम में पहुँचीं। शताद्रु ने कहा, “जब तक वह वहाँ पहुँचीं, तब तक मैदान के अंदर शायद ही 200 लोग बचे होंगे। वे चाहते थे कि चुनावों से पहले किसी को बलि का बकरा बनाया जाए, इसलिए उन्होंने खेल मंत्री को बचाने और पुलिस विभाग की साख बचाने के लिए मुझे गिरफ़्तार कर लिया—खासकर इसलिए, क्योंकि पुलिस विभाग का प्रभार खुद ममता बनर्जी के पास है। लेकिन जनता बेवकूफ़ नहीं है। उन्हें पता था कि असल में हुआ क्या था, और इसी वजह से अरूप बिस्वास को 20 साल बाद अपने ही चुनाव क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा।”
15 साल से कर रहा काम
अपने 15 साल के करियर के बारे में बताते हुए शताद्रु ने बताया कि पश्चिम बंगाल में काम करते समय प्रमोटरों को कितने जबरदस्त दबाव का सामना करना पड़ता है। साथ कहा कि उन्होंने पेले, डिएगो माराडोना, एमिलियानो मार्टिनेज, काफ़ू और रोनाल्डिन्हो जैसे खेल दिग्गजों के भारत बुलाया।
उन्होंने आरोप लगाया, “मैं पिछले 15 सालों से लगातार यह काम कर रहा हूँ। TMC की सत्ता के दौरान भी, मैंने BJP नेताओं के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किए, क्योंकि वे खेल प्रेमी थे। यह किसी राजनीतिक जुड़ाव की बात नहीं थी; यह एक मजबूरी थी। अगर आप बंगाल में कोई कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित करना चाहते हैं, तो यह बेहद मुश्किल है, जब तक कि आप स्थानीय राजनीतिक नेताओं के हुक्म के आगे न झुकें। बंगाल में, यह एक तरह की दादागिरी है। अगर आप उनकी बात नहीं मानते, तो वे अनुमति नहीं देते या रोक देते हैं या फिर आपको अलग-अलग तरीकों से परेशान करते हैं।”
मंत्री की मनमानी सभी को पता
शताद्रु दत्ता ने दावा किया कि अरूप बिस्वास की कथित मनमानी कोलकाता के खेल जगत में एक ओपन सीक्रेट थी। उन्होंने कहा, “आप मैदान के किसी भी स्पोर्ट्स क्लब या किसी भी कॉन्सर्ट ऑर्गनाइज़र से पूछ लीजिए—वह लंबे समय से टिकटों की ज़बरन वसूली कर रहा है। मुझमें सच बोलने की हिम्मत है। ईस्ट बंगाल जैसे क्लब शायद डर के मारे चुप रहें, लेकिन मोहन बागान निश्चित रूप से इस बात की पुष्टि करेगा कि उन्हें टिकटों को लेकर कितना जबरदस्त दबाव झेलना पड़ता है। सॉल्ट लेक स्टेडियम प्रशासन खेल मंत्री के रसूख के साथ मिलकर काम कर रहा था। यह पूरी तरह से एक साठगांठ थी।”
शताद्रु ने अपनी बात खत्म करते हुए बताया कि इवेंट के दौरान अर्जेंटीना के कप्तान मेसी को कितनी असहजता महसूस हुई। उन्होंने कहा, “मंत्री को शो फ्लोर पर नहीं होना चाहिए था, लेकिन फिर भी वे वहाँ चले आए। वहाँ पहुँचते ही उन्होंने सबसे पहले मेसी की कमर और कंधे को पकड़ लिया। लैटिन अमेरिकी संस्कृति में, इस तरह का बिना बुलाए टच करना बेहद खराब माना जाता है, लेकिन वे मेसी का पीछा ही नहीं छोड़ रहे थे। मैं मेसी को जहाँ भी ले जाता, मंत्री भी हमारे पीछे-पीछे चले आते।”
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