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जयललिता की मौत से ऐन पहले शशिकला ने बनाया था “तख्तापलट” का प्लान

शशिकला के पति एन नटराजन को तमिलनाडु का अमर सिंह कहा जाता है। उनके करीबी रिश्ते कांग्रेस, बीजेपी, डीएमके और एआईएडीएमके के बड़े नेताओं के साथ रहे हैं।

Author December 11, 2016 10:21 AM
जे जयललिता (दाएं) के साथ शशिकला नटराजन (PTI फाइल फोटो)

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत की आधिकारिक घोषणा से पहले उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन बारी-बारी से एआईएडीएमके के विधायकों को अपोलो अस्पताल बुलाकर सादे कागज पर हस्ताक्षर करा रही थीं। इसके पीछे उनका मकसद खुद मुख्यमंत्री बनना था लेकिन कुछ विधायकों के विरोध करने की वजह से ऐसा नहीं हो सका और आखिरकार ओ पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। सूत्र बताते हैं कि जयललिता की मौत से पहले ही शशिकला नटराजन के लोग उन्हें सीएम बनाने की जुगत में भिड़ गए थे। इसी कोशिश में विधायकों से सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए थे। इन हस्ताक्षरों को राज्यपाल सी विद्यासागर राव के पास पेश करने की मंशा थी।
ओ पनीर सेल्वम और शशिकला दोनों थेवर समुदाय से आते हैं। अब शशिकला जयललिता की विधानसभा सीट आर के नगर विधानसभा से चुनाव लड़ने की सोच रही हैं। इसके पीछे भी उनकी मंशा यह है कि वो खुद को जयललिता की उत्तराधिकारी साबित कर सकें।

shashikala Natrajan शशिकला नटराजन (ग्राफिक्स- मनाली घोष)

शशिकला के पति एन नटराजन को तमिलनाडु का अमर सिंह कहा जाता है। उनके करीबी रिश्ते कांग्रेस, बीजेपी, डीएमके और एआईएडीएमके के बड़े नेताओं के साथ रहे हैं। शायद यही वजह है कि जयललिता ने उन्हें अपने से दूर कर रखा था। लेकिन जयललिता की मौत के बाद अचानक वो फिर से सक्रिय हो गए हैं। अब तो न सिर्फ शशिकला नटराजन और उनके पति बल्कि उनके परिवार के कुल सतरह लोग मैदान में उतर आए हैं। इसकी बानगी उस वक्त भी देखने को मिली थी जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वर्गीय जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई के राजाजी हॉल पहुंचे थे और उन्होंने सांत्वना देते हुए शशिकला के सिर पर हाथ रखकर दुख की घड़ी में साथ देने का भरोसा दिया था।

शशिकला का परिवार शशिकला का परिवार

गौरतलब है कि करीब 75 दिनों तक अपोलो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद जे जयललिता 5 दिसंबर को जिंदगी की जंग हार गई थीं। उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। जयललिता चेन्नई के ग्रीम्स रोड स्थित अपोलो अस्पताल में 22 सितंबर को भर्ती हुई थीं। उस वक्त उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी थी। इसके बाद बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है लेकिन उससे जुड़ी किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी गई थी। अपोलो अस्पताल की मेडिकल बुलेटिन्स में कहा गया था कि जयललिता की हालत सुधर रही है और वो रिस्पॉन्ड कर रही हैं। 4 दिसंबर को अचानक कहा गया कि उन्हें मैसिव कार्डियक अरेस्ट हुआ है और अगले दिन 5 दिसंबर को 75 दिनों तक लगातार अस्पताल में रहने के बाद अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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