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6 साल में 60 लाख रुपए तक बढ़ी NCP चीफ शरद पवार की दौलत, 20 करोड़ से अधिक की चल संपत्ति के हैं मालिकान

पवार ने अपने शपथपत्र में एक करोड़ रुपये की देनदारी की भी घोषणा की है जो उनके भतीजे अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और पोते पार्थ पवार से शेयर स्थानांतरण के बदले में अग्रिम राशि के तौर पर मिले हैं।

Sharad Pawarएनसीपी प्रमुख शरद पवार। (file)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा। राज्यसभा चुनाव 26 मार्च को होना है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने यहां विधान भवन परिसर में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा अपने दायर किए गए शपथपत्र में दी। इसमें खुलासा हुआ है कि राकांपा प्रमुख की संपत्ति पिछले छह साल में 60 लाख रुपये तक बढ़कर 32.73 करोड़ रुपये हो गई।

पवार ने अपने शपथपत्र में एक करोड़ रुपये की देनदारी की भी घोषणा की है जो उनके भतीजे अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और पोते पार्थ पवार से शेयर स्थानांतरण के बदले में अग्रिम राशि के तौर पर मिले हैं। वर्ष 2014 के राज्यसभा चुनाव में पवार ने 20,47,99,970.41 रुपये की चल संपत्ति और 11,65,16,290 की अचल संपत्ति समेत कुल 32.13 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति की घोषणा की थी। हालांकि, उस समय पवार ने किसी भी देनदारी का उल्लेख नहीं किया था।

बुधवार को दाखिल शपथपत्र के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने 25,21,33,329 रुपये की चल संपत्ति और 7,52,33,941 रुपये की अचल संपत्ति समेत कुल 32.73 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की है। बुधवार को दाखिल शपथपत्र में उल्लेख किया गया है कि पवार की पत्नी प्रतिभा पवार को सुनेत्रा पवार की ओर से शेयर स्थानांतरण के बदले अग्रिम राशि के तौर पर 50 लाख रुपये मिले हैं।

इसी तरह अविभाजित हिन्दू परिवार के नियमानुसार, शरद पवार को पोते पार्थ पवार की ओर से शेयर स्थानांतरण के बदले अग्रिम राशि के तौर पर 50 लाख रुपये मिले हैं। इस तरह उनकी कुल देनदारी एक करोड़ रुपये है।

बुधवार को पवार राज्य के राकांपा नेताओं के साथ नमकन दाखिल करने पहुंचे थे। राकांपा नेता और पूर्व मंत्री फौजिया खान भी पवार के साथ नजर आईं। पवार के अलावा केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले, कांग्रेस के हुसैन दलवई, शिवसेना के राजकुमार धूत, भाजपा के अमर सबले, भाजपा समर्थित निर्दलीय नेता संजय काकड़े और राकांपा के मजीद मेमन का भी राज्यसभा का कार्यकाल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है। सत्तारूढ़ शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा आसानी से चुनाव जीत सकती हैं क्योंकि एक उम्मीदवार को जीत के लिए सिर्फ 37 वोट चाहिए। सत्तारूढ़ पार्टियों के नेता रणनीति तय करने के लिए बुधवार शाम बैठक करेंगे।

(भाषा इनपुट के साथ)

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