एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर चल रही चर्चा महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। अजित पवार के निधन के बाद से इन अटकलों को और ज्यादा हवा मिली है। इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने एक बयान में कहा था कि अगर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई बात अंतिम चरण में होती, तो अजित दादा उन्हें पहले से इसकी जानकारी जरूर देते।

शरद पवार क्यों हुए नाराज?

अब मुख्यमंत्री के इसी बयान पर शरद पवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार सुबह एक प्रेस वार्ता के दौरान शरद पवार ने मुख्यमंत्री के बयान पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि मुख्यमंत्री बार-बार मेरा नाम क्यों ले रहे हैं। उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। इस समय जो भी चर्चा चल रही है, वह कहीं भी औपचारिक बातचीत या निर्णय के स्तर पर नहीं है। मुझे समझ नहीं आता कि वे किस आधार पर और किस अधिकार के साथ इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।”

शरद पवार ने आगे साफ किया कि उनके सहयोगी जयंत पाटिल और अजित पवार के बीच कुछ बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन इससे ज्यादा उन्हें इस विषय में कुछ नहीं कहना है।

सीएम फड़नवीस ने क्या कहा था?

गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा था कि अगर एनसीपी के विलय को लेकर कोई भी बात अंतिम दौर में होती, तो अजित दादा सरकार को जरूर विश्वास में लेते। अगर कोई तारीख तय होती या कोई ठोस फैसला लिया जाता, तो इसकी जानकारी सरकार को मिल जाती। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार से पूछे बिना या जानकारी दिए बिना ऐसा कोई फैसला संभव नहीं है।

इस बीच ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि शरद पवार उस जगह का निरीक्षण कर सकते हैं, जहां अजित पवार का स्मारक बनाया जाना है। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे इस बारे में सवाल किया गया, तो शरद पवार ने दो टूक कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई ठोस फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस तरह के किसी भी बयान या अटकलों पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।

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