उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले हफ्ते माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी के खिलाफ एक नया आपरधिक मामला दर्ज किया है। मुख्तार अंसारी की मार्च, 2024 में बांदा जेल में मौत हो गई थी। अफशां अंसारी अपने पति की मौत के बाद से फरार हैं।
इस मामले में अफशां अंसारी अकेली नहीं हैं। राज्य के दो अन्य कुख्यात माफिया सरगनाओं की पत्नियां भी अपने पतियों की मृत्यु के बाद से यूपी पुलिस की तलाश में हैं और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। अतीक अहमद और उनके छोटे भाई अशरफ को अप्रैल 2023 में पुलिस हिरासत में मीडिया के कैमरों के सामने गोली मार दी गई थी। उनकी पत्नियों शाइस्ता परवीन और जैनब फातिमा के अलावा पुलिस तब से ही दोनों भाइयों की बड़ी बहन आयशा नूरी की तलाश कर रही है।
फरार चारों महिलाओं की उम्र 50-60 के बीच
यह चारों महिलाओं जो पुलिस की पकड़ से अभी तक दूर हैं। इनकी उम्र 50-60 साल के बीच है। पुलिस ने इनके ठिकाने को लेकर इनाम का ऐलान भी किया है, लेकिन इसके बावजूद भी वह अभी तक पकड़ से बाहर है। शाइस्ता परवीन और अफशां के लिए 50,000 रुपये, जैनब और आयशा के लिए 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इन चारों पर मृतक माफिया सरगनाओं द्वारा किए गए अपराधों में साजिश रचने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि वे महिलाओं का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जिसमें उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए दबाव डालना भी शामिल है।
अफशां के खिलाफ दर्ज नवीनतम मामला उसके नाम पर जारी हथियार लाइसेंस के तहत प्राप्त रिवॉल्वर से संबंधित है। गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक इराज राजा ने बताया कि उस पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत एक मामले सहित पांच अन्य मामले दर्ज हैं और इस एक्ट के तहत उसकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है।
शाइस्ता, जैनब और नूरी हत्या की साजिश में कथित भूमिका के लिए वांछित हैं। शाइस्ता और जैनब प्रयागराज में रहती थीं, जबसे वह फरार हैं, जबकि आयशा मेरठ में रहती थी। अफशां गाजीपुर जिले की मूल निवासी है। गाजीपुर एसपी ने कहा कि अफशां अभी भी वांछित भगोड़ा है और पुलिस टीमें उसे ढूंढने के लिए छापेमारी कर रही हैं।
यूपी पुलिस के सूत्रों ने बताया कि जब उन्हें खुफिया जानकारी मिली कि अफशां देश से भागने की कोशिश कर सकती हैं तो उन्होंने सीबीआई और आव्रजन विभाग सहित केंद्रीय एजेंसियों से उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने के लिए संपर्क किया।
मुख्तार अंसारी, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों को जारी किए गए हथियारों की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस द्वारा की गई जांच के बाद अफशां के खिलाफ नवीनतम मामला दर्ज किया गया। जांच में पाया गया कि अफशां के नाम पर एक हथियार लाइसेंस था, जिसके तहत एक रिवॉल्वर खरीदी गई और बाद में बेच दी गई तथा एक अन्य हथियार प्राप्त किया गया।
हालांकि, गाजीपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के अभिलेखागार से रिवॉल्वर की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज गायब पाए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि ये दस्तावेज कर्मचारियों की मिलीभगत से हटाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि वे रिवॉल्वर का भी पता नहीं लगा पाए हैं और उनका मानना है कि अंसारी गिरोह के सदस्यों द्वारा इसके इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए इससे संबंधित कागजात जानबूझकर छिपाए गए थे।
अफशां के अलावा, एफआईआर में बृज नारायण राम और भीष्म सिंह यादव का नाम भी शामिल है, जो डीएम कार्यालय में रिकॉर्ड सहायक के रूप में काम करते थे। बृज नारायण राम का निधन हो चुका है। आरोपियों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
उमेश पाल हत्याकांड
प्रयागराज में फरवरी 2023 में वकील उमेश पाल और उनके दो पुलिस सुरक्षाकर्मियों संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की हत्या के सिलसिले में अतीक अहमद की पत्नी, बहन और भाभी वांछित हैं। यह हमला उमेश पाल के घर के बाहर दिनदहाड़े हुआ था जिसमें हमलावरों ने गोलियां चलाईं और देसी बम फेंके थे। प्रयागराज पुलिस ने तीनों के खिलाफ भगोड़ा घोषित होने के बावजूद अदालत में पेश न होने के लिए मामले दर्ज किए हैं।
आयशा के पति अखलाक अहमद जो मेरठ के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के रूप में काम करते थे। उनको भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर उमेश पाल हत्याकांड के एक आरोपी गुड्डू मुस्लिम को शरण देने का आरोप है। गुड्डू भी लापता है। अतीक के दो बेटे, अली अहमद और मोहम्मद उमर भी जेल में हैं।
उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी साबिर के साथ गुड्डू का नाम भी यूपी पुलिस की 30 सबसे वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। दोनों पर पांच लाख रुपये का इनाम है। सूची में ये चार महिलाएं शामिल नहीं हैं, जिनमें दीप्ति बहल एकमात्र महिला हैं। पूर्व कॉलेज प्रिंसिपल बहल 2019 से फरार हैं और उन पर बाइक टैक्सी व्यवसाय में कथित तौर पर 4,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। देशभर में उनके खिलाफ 118 मामले दर्ज हैं।
‘मैं बैठ भी नहीं पा रहा हूं…’, मौत से पहले मुख्तार अंसारी ने किसे किया था आखिरी फोन?
माफिया मुख्तार अंसारी की मौत बांदा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई थी। मुख्तार की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी। मुख्तार की मौत के बाद विपक्षी दलों के तमाम नेताओं ने यूपी की योगी सरकार पर सवाल खड़े किए थे। पढ़ें पूरी खबर।
