ताज़ा खबर
 

बिहार: शाहनवाज के टिकट पर सियासी हलकों में चर्चा- क्या पार्टी में घटाया जा रहा हुसैन का कद या राज्य में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा पेश करने का प्रयास!

धुर विरोधी माने जाना वाला अश्विनी चौबे गुट उम्मीदवारी के ऐलान के बाद से ही बैचैन नजर आ रहा। अंदरूनी तौर पर सीएम नीतीश कुमार भी खार खाए हैं। लोकसभा चुनाव में जदयू भागलपुर सीट पर अपने उम्मीदवार अजय मंडल के लिए अड़ गई थी, सीट लेकर ही मानी, जीती भी थी।

shahnawaz hussainभाजपा नेता शाहनवाज हुसैन। (एक्सप्रेस फोटो)

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को पार्टी बिहार विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार घोषित कर एक दफा फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है। जम्मू कश्मीर स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा को मिली सफलता से शहनवाज हुसैन काफी उत्साहित है। पार्टी के निर्देश पर वह वहां गए थे। यह भी तय है कि बंगाल चुनाव में भी पार्टी उनका उपयोग करेगी।लेकिन विधान परिषद की सीट पर उम्मीदवार घोषित करना राजनीतिक हलकों में इनका कद छोटा करने की कोशिश माना जा रहा है।

बता दें कि शाहनवाज हुसैन भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते रहे है। मगर 2014 के चुनाव में भागलपुर संसदीय सीट पर इनकी पराजय के साथ इनके सितारे गर्दिश में आ गए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दिया, जबकि ये खुद केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य थे, मगर ये अपने लिए एक सीट का जुगाड़ नहीं कर पाए थे। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव में भागलपुर सीट से इनको भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा तेजी से फैली थी, मगर बाद में शिगूफा साबित हुई।

अब इन्हें बिहार विधान परिषद में भेजने के लिए पार्टी का ऐलान इनके समर्थकों को गले नहीं उतर रहा। हालांकि कई लोग इनको बधाई जरूर दे रहे है। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अभय वर्मन ने भी जीत की कामना के साथ बधाई दी है। इस बीच केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे खेमा इनकी उम्मीदवारी पर चुप है। उसकी तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नरेश मिश्रा इनकी उम्मीदवारी पर बेहद खुश है। छह साल के वनवास के बाद पार्टी ने इन्हें किसी सदन का सदस्य बनाने का फैसला तो किया। ये कहते है कि यह इनकी वफादारी का इनाम है। आगे इन्हें राज्य का मंत्री भी बनाया जाएगा। ऐसी इन्हें उम्मीद है। हालांकि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। इन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से कई सवाल भी खड़े हो गए है। इन्हें बिहार की राजनीति में भेजकर केंद्र की राजनीति से पार्टी कहीं इनसे छुटकारा तो नहीं चाह रही है। दूसरी तरफ संभावना यह भी है कि बिहार विधान परिषद सदस्य बना पार्टी राज्य में इन्हें मुस्लिम चेहरे के तौर पर तो पेश नहीं कर रही?

दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं बनाया था। हिंदू मतदाताओं के भरोसे रही भाजपा को वैसी सफलता नहीं मिली। यह अलग बात है कि राजग की सरकार बनी है। लेकिन अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। शाहनवाज हुसैन 1999 में किशनगंज से सांसद बनकर अटल बिहारी बाजपेई की सरकार में केंद्रीय उड्डयन मंत्री बनाए गए। दो दफा भागलपुर से सांसद बने। तीसरी दफा पराजित हुए। यानी शुरू से ही केंद्र की राजनीति में रहे। बिहार की राजनीति से इन्हें वैसा पाला कभी नहीं पड़ा है।

अब एक झटके में बिहार की राजनीति करने भेज दिया गया। वह भी विधान परिषद चुनाव में उतारकर। दिलचस्प बात यह है कि अभी यह भी साफ नहीं है कि इन्हें विनोद नारायण झा की खाली हुई सीट पर लड़ाया जा रहा है या सुशील मोदी की सीट से। यह नामांकन करते वक्त पता चलेगा। विनोद नारायण झा मधुबनी ज़िले के बेनीपट्टी सीट से 2020 विधानसभा चुनाव जीत विधायक बन चुके है। ये विधान परिषद सदस्य थे। इनके इस्तीफा देने से यह सीट खाली हुई है। मगर इस सीट का कार्यकाल अगले साल जुलाई में पूरा हो रहा है। शाहनवाज इस सीट पर खड़े होंगे तो करीब डेढ़ साल ही विधायक रह पाएंगे।

दूसरी सीट सुशील मोदी के राज्यसभा सदस्य चुन लिए जाने से खाली हुई है। इस सीट का कार्यकाल मई 2024 तक का है। यदि इस सीट पर निर्वाचित हुए तो करीब तीन साल रहेंगे। मसलन किसी भी हाल में बिहार की राजनीति में बने रहने या मंत्री पद पर बने रहने के लिए इनको दो चुनाव झेलने पड़ेंगे। हालांकि मंत्री पद मिलने की अभी कयास है। यों भाजपा में बिहार राजनीति के माहिर और पूर्व मंत्री रहे और फिर मंत्री बनने की उम्मीदों वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। शाहनवाज हुसैन को ऐसे नेता कितना झेल पाएंगे, यह आगे वक्त बताएगा।

दूसरी तरफ इनके धुर विरोधी माने जाना वाला अश्विनी चौबे गुट इनकी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद से ही बैचैन नजर आ रहा है। अंदरूनी तौर पर नीतीश कुमार भी इनसे खार खाए है। तभी लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट पर जदयू अड़ गई थी। और हासिल कर अपना उम्मीदवार अजय मंडल को खड़ा किया और जीते। शाहनवाज का पत्ता साफ हुआ। ऐसा राजनीतिक गलियारों में फिर चर्चा उभरी है। इन हालातों में बिहार की राजनीति में शाहनवाज हुसैन के लिए खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो सकता है।

Next Stories
1 किसान आंदोलन: ट्रैक्टर परेड के लिए हरियाणा के गांवों में लोगों से दान करने की अपील
2 कर्नाटक के कई क्षेत्रों को महाराष्ट्र में शामिल करेंगे- सीएम उद्धव ठाकरे का ऐलान
3 बिहार: विधान परिषद सीट के ऑफर को वीआईपी ने ठुकराया, पार्टी बोली- 4 नहीं 6 साल के कार्यकाल वाली सीट दे भाजपा
ये पढ़ा क्या?
X