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गोपाल भार्गव चुने गए मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष, जानिए क्यों कहे जाते हैं ‘शादी बाबा’

छात्र राजनीति के दौर में कॉलेज निर्माण के लिए जेल में रहे गोपाल भार्गव 1980 में पहली बार गढ़ाकोटा नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1984 में पहली बार रहली से विधायक बने।

गोपाल भार्गव, नेता प्रतिपक्ष, मध्य प्रदेश (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार नेता प्रतिपक्ष के लिए गोपाल भार्गव के नाम पर मुहर लगा दी है। कभी भी चुनाव नहीं हारने वाले भार्गव अपने इलाके में ‘शादी बाबा’ के नाम से भी मशहूर है। रहली से लगातार आठवीं बार विधायक बने हैं। वे शिवराज सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री थे। भार्गव शिवराज के साथ-साथ संघ के भी खासे करीब माने जाते हैं। भोपाल में हुई बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर गए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। वहीं इसी पद की रेस में शामिल रहे नरोत्तम मिश्रा और कुंवर सिंह ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

1980 से की थी चुनावी करियर की शुरुआतः छात्र राजनीति के दौर में कॉलेज निर्माण के लिए जेल में रहे गोपाल भार्गव 1980 में पहली बार गढ़ाकोटा नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1984 में पहली बार रहली से विधायक बने। भार्गव को उमा भारती की सरकार में पहली बार मंत्री बनाया गया था। 2008 में उन्हें पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया। फिलहाल वे मध्य प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

यूं रेस से बाहर हुए शिवराजः शुरुआती दौर में शिवराज सिंह को मजबूत दावेदार माना जा रहा था लेकिन शनिवार को उन्होंने खुद कह दिया कि वह 13 साल तक लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, इसलिए चाहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष पद पर किसी नए व्यक्ति को मौका मिले।

क्यों कहे जाते हैं ‘शादी बाबा’: भार्गव अपने क्षेत्र के लोगों से जबर्दस्त जुड़ाव रखते हैं। उनके यहां गम हो या खुशी हर वक्त बराबर मौजूद रहते हैं। हर साल में दो बार सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन भी करवाते हैं। इसीलिए उन्हें ‘शादी बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने बेटे की शादी भी ऐसे ही समारोह में की थी।

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