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एसजीपीसी ने चार पंज प्यारों को बर्खास्त किया

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शुक्रवार को चार पंज प्यारों को बर्खास्त कर दिया और पांचवें को सेवानिवृत्त घोषित कर दिया..

Author अमृतसर | January 2, 2016 02:18 am
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने चार पंज प्यारों को बर्खास्त कर दिया और पांचवें को सेवानिवृत्त घोषित कर दिया..

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शुक्रवार को चार पंज प्यारों को बर्खास्त कर दिया और पांचवें को सेवानिवृत्त घोषित कर दिया। इस बर्खास्तगी को पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि पिछले सोमवार को पंज प्यारों ने एसजीपीसी से कहा था कि वह एक जनवरी तक पांच तख्तों के जत्थेदारों को हटाए। बीते 23 अक्तूबर को जारी किए गए अपने पहले के ‘गुरमत’ का पालन नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए 28 दिसंबर को पंज प्यारों ने कहा था कि एसजीपीसी की ओर से एक जनवरी तक जत्थेदारों को हटाए जाने के बाद वे दो जनवरी को सिख समुदाय के भविष्य के कदम के बारे में घोषणा करेंगे। एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने एक लिखित बयान में सभी पंज प्यारों को ‘वेतनभोगी कर्मी’ करार देते हुए कहा कि सेवा नियमों के साथ-साथ सिख धर्म के नियम-कायदों का ‘घोर उल्लंघन’ करने के कारण चार कर्मियों को बर्खास्त किया गया है।

मक्कड़ ने कहा कि भाई सतनाम सिंह, भाई तरलोक सिंह, भाई सतनाम सिंह और भाई मंगल सिंह को बर्खास्त कर दिया गया है जबकि पांचवें कर्मी भाई मेजर सिंह गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। बहरहाल, एसजीपीसी ने सेवानिवृत्त पंज प्यारों के खिलाफ किसी अनुशासनिक कार्रवाई का जिक्र नहीं किया है। मक्कड़ ने कहा कि पंज प्यारे एसजीपीसी के साथ-साथ सिख धर्म में भी काफी सम्मानित हैं लेकिन वे एसजीपीसी के ‘वेतनभोगी कर्मी’ भी हैं जिसके कारण उन पर यह शर्त लागू होती है कि वे धार्मिक सेवा नियमों का ‘उल्लंघन’ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इन पंज प्यारों ने अपने धार्मिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर सिखों की सर्वोच्च संस्था ‘अकाल तख्त’ के साथ-साथ अकाल तख्त के मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के समक्ष चुनौती पेश की है।

मक्कड़ ने कहा कि उन्होंने अकाल तख्त की सर्वोच्च शक्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए ‘गहरी साजिश’ रची थी। उन्होंने कहा कि पंज प्यारे अगर अपनी मर्जी से धार्मिक फैसलों का एलान करते रहेंगे, खासकर मौजूदा जत्थेदार अकाल तख्त के खिलाफ तो इससे अराजकता पैदा हो जाएगी और सिख समुदाय में बेचैनी पैदा हो जाएगी। इसलिए ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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