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राजस्थानः बढ़ गया सूबे में बाल उत्पीड़न

बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामले राजस्थान में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। प्रदेश के सात जिलों में तो हालात अच्छे नहीं हैं।

Author जयपुर | March 14, 2018 2:04 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामले राजस्थान में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। प्रदेश के सात जिलों में तो हालात अच्छे नहीं हैं। प्रदेश में हर दिन औसतन सात बच्चे यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं रोकने के लिए सरकार ने कानून बना रखे हैं, इसके बावजूद मामले बढ़ रहे हैं। प्रदेश में हाल में ही सरकार ने 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले को मौत की सजा का कानून भी बना दिया है। प्रदेश में चार साल पहले 2014 में 2229 मामले सामने आए थे जो अब बढ़कर 2383 हो गए हैं। प्रदेश के सात जिले तो ऐसे हंै जो बच्चों के साथ हो रही इस प्रकार की घटनाओं में हर साल अव्वल रहते हैं। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में ऐसा कोई जिला नहीं है, जहां इस प्रकार की एक भी घटना नहीं हुई हो और हर साल सभी जिलों में मामले दर्ज हो रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 में दुष्कर्म के कुल 3305 प्रकरण सामने आए थे। इनमें से 1300 मामले तो सिर्फ बच्चियों से ही जुड़े हुए थे। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की तरफ से जारी रिपोर्ट के आधार पर तो उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र इस मामले में देश में अव्वल हंै। ऐसे अपराधों में राजस्थान नौवें नंबर पर है। इसे जनसंख्या के लिहाज से देखें तो 6 करोड़ से ज्यादा वाले प्रदेशों में राजस्थान छठें नंबर पर है।

बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों पर पास्को एक्ट-2012 के तहत मामला दर्ज होता है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल असाल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे मामलों में पीड़ितों की मदद करने वाले वकील एमएल गुप्ता का कहना है कि अधिनियम के तहत अलग-अलग धाराओं में दोषी पाए जाने पर पांच साल की सजा से लेकर उम्रकैद की सजा देने और अर्थदंड लगाए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद हर साल राजस्थान में पास्को एक्ट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे कई मामलों का तो पता ही नहीं चल पाता है। बच्चों की शिकायत के बावजूद उनके शिक्षक और अभिभावक इसे गंभीरता से नहीं ले पाते हैं। इसके अलावा पुलिस भी राजीनामा करवाने पर जोर देकर मामला रफा दफा करवा देती है। ग्रामीण और अशिक्षित वर्ग के बच्चों की तो बात को ही अनसुना कर दिया जाता है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ऐसे मामलों को गंभीर मानती हैं। चतुर्वेदी ने पिछले कुछ समय में प्रदेश के कई इलाकों का दौरा कर प्रशासन और पुलिस से ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करवाई है।

राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार तीन जिलों में तीन साल में ही सौ से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें जयपुर, बारां और कोटा जिलों में हर साल सौ से ज्यादा बच्चों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाएं हुई हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 में दर्ज मामलों के अनुसार जयपुर में 204, कोटा में 148, बारां में 121, अलवर में 126, अजमेर में 98, उदयपुर में 86 और भीलवाड़ा में 98 मामले दर्ज हुए हंै। पास्को एक्ट के मामलों के निस्तारण की गति भी बहुत ही धीमी है। इसमें सुधार के लिए भी सरकार के स्तर पर कोई प्रयास नहीं होना सामाजिक संगठनों के लिए चिंता बना हुआ है। सामाजिक संगठनों की तरफ से बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए समय समय पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं।

राज्य में 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले का मौत की सजा का बिल विधानसभा ने पास कर दिया है। इसे अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा। विधानसभा से कानून पास होने के बाद गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि इसमें तीन तरह की सजा का प्रावधान किया गया है। न्यूनतम 14 साल की सजा, उसके बाद आजीवन कारावास का दंड और तीसरा सबसे कठोर प्रावधान मृत्यु दंड का किया गया है। सामूहिक दुष्कर्म की घटना में शामिल हर दोषी व्यक्ति को मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।

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