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कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न में बढ़ोत्तीः National Commission for Woman

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) के मुताबिक कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) के मुताबिक कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2013 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की 249 शिकायतों (रिपोर्ट की गई) की तुलना में 2014 में यह संख्या दोगुनी होकर 526 तक पहुंच गई।

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने, रोकथाम करने और शिकायतों के निवारण और इससे जुड़े मामलों के लिए सुरक्षा प्रदान करना है। अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों का उद्देश्य सभी महिला कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और सुशासन के तरीकों को अपनाना है। यह नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वह महिलाकर्मियों को एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए। आंतरिक शिकायत समिति का गठन, यौन उत्पीड़न की दंडात्मक परिणामों को कार्यस्थल पर प्रदर्शित करना, आइसीसी के सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम और कर्मचारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम की कंपनियों नियोक्ता द्वारा व्यवस्था करना अधिनियम के तहत अनिवार्य बनाया गया है।

फिक्की-ईवाई रिपोर्ट फोस्टरिंग सेफ वर्कप्लेसेस महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के संबंध में कार्यबल की बदलती गतिशीलता की पहचान करने के लिए एक अध्ययन है। सर्वेक्षण दिखाता है कि 31 फीसद उत्तरदाताओं ने अधिनियम (जो शिकायतों के समाधान के लिए आंतरिक शिकायत समिति, का गठन किया जाना अनिवार्य बनाता है) के लागू किए जाने के बाद इसे लागू ही नहीं किया। अनुपालन न करने वालों में 36 फीसद भारतीय कंपनियां और 25 फीसद बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं। 40 फीसद उत्तरदाताओं के मामले में आंतरिक शिकायत समिति सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाना अब भी बाकी है। इस संबंध में भारतीय कंपनियों का फीसद 47 है। दूसरी ओर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में यह आंकड़ा 34 फीसद है।

सर्वेक्षण में शामिल 35 फीसद उत्तरदाताओं को इस बात की जानकारी नहीं थी कि आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के संबंध में कानून का अनुपालन नहीं करने पर कैसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। हैरानी की बात है कि इस मामले में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ज्यादा अनभिज्ञ पाया गया। करीब 38 फीसद कंपनियों को इस बात की जानकारी नहीं थी। 44 फीसद उत्तरदाता संगठनों ने अपने परिसर में यौन उत्पीड़न की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों और चेतावनी को प्रदर्शित नहीं किया था।

फिक्की महासचिव डॉक्टर ए दीदार सिंह ने कहा कि यह नियोक्ता का उत्तरदायित्व है कि वह महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करे। यह न केवल एक कानूनी अनिवायर्ता है, बल्कि यह संगठन की प्रगति के लिए भी आवश्यक है। इस विषय को यदि गंभीरता से नहीं लिया जाएए तो यह कर्मियों के बीच गलत संदेश पहुंचाएगा। कर्मियों के बीच असुरक्षा की भावना आ जाएगी जिसका परिणाम कार्य असंतुष्टि और कारोबार में कमी और इस कारण से मूल्यवान कर्मियों की हानि और आर्थिक लागत में बढ़ोत्तरी के रूप में होगा।

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