हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। शिमला जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कब्जा जमाया है। सबसे बड़ी बात यह है कि शिमला जिले के आठ में से सात विधायक कांग्रेस के हैं और राज्य सरकार में जिले से तीन मंत्री भी शामिल हैं। ऐसे में शिमला जिला परिषद का चुनाव हारना कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा।

शिमला को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। अब तक जिला परिषद में कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा था। 25 सदस्यीय परिषद में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था और दो निर्दलीय सदस्यों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही थी।

भाजपा ने निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कब्जा जमाकर 26 वर्षों में शिमला जिला परिषद चुनाव जीता है। भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिसोदिया गुरुवार को अध्यक्ष और भरत सिंह कलांटा उपाध्यक्ष चुने गए।

सिसोदिया को 13 वोट मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र रेटका को 10 वोट मिले। दो वोट अमान्य घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कलांटा को 14 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की मीनाक्षी को 10 वोट मिले, जिनमें से एक वोट अमान्य घोषित किया गया। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के तीन मंत्री – विक्रमादित्य सिंह, रोहित ठाकुर और अनिरुद्ध सिंह शिमला जिले से हैं।

शिमला जिला परिषद चुनावों के बाद शीर्ष दो पदों के लिए चुनाव कराने में तीन महीने से अधिक की देरी के बाद कानूनी कार्यवाही शुरू होने पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई थी।

शिमला जिला परिषद में 25 निर्वाचित सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 11, कांग्रेस के 10 और चार निर्दलीय सदस्य शामिल हैं। बहुमत के लिए कुल 13 वोटों की आवश्यकता थी, जिससे निर्दलीय सदस्यों की भूमिका निर्णायक साबित हुई। उनके समर्थन से भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर दोनों महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा कर लिया।

पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने इसे लोकतंत्र की जीत और सत्ता के दुरुपयोग तथा तानाशाही के माध्यम से जनादेश हथियाने की कोशिश करने वालों की हार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनादेश को प्रभावित करने के लिए हर संभव रणनीति अपनाई, लेकिन उसकी सभी कोशिश नाकाम साबित रहीं। जन प्रतिनिधियों ने राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग से लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों को करारा जवाब दिया है।

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