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घरेलू सहायकों के लिए अलग लिफ्ट! भारत 21वीं सदी का है?

दिल्ली और अन्य शहरों में चल रहीं प्लेसमेंट एजंसियां मानव तस्करी का बड़ा अड्डा बन गई हैं।
Author नई दिल्ली | July 22, 2017 00:41 am
स्वाती मालीवाल

दिल्ली और अन्य शहरों में चल रहीं प्लेसमेंट एजंसियां मानव तस्करी का बड़ा अड्डा बन गई हैं। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने जनसत्ता बारादरी की बैठक में बताया कि जब हमने आधिकारिक आंकड़े जुटाए तो दिल्ली में कागजों पर महज 1500 प्लेसमेंट एजंसियां पंजीकृत हैं। लेकिन हकीकत में 15000 से ज्यादा प्लेसटमेंट एजंसिया काम कर रही हैं। ये किसी नियम-कानून का पालन नहीं करतीं। लड़कियों को रोजी-रोटी चाहिए और घरों को काम करनेवाले सहायक। इन दो जरूरतों का मिलन कराने वाली ये संस्थाएं काम पाने की कोशिश करने वाली लड़कियों का शोषण करती हैं। मालीवाल ने कहा कि पिछले कुछ समय में हमने 150 ऐसी लड़कियों को बचाया हैं जिन्हें प्लेसमेंट एजंसियों ने मानव तस्करी में धकेल दिया था। यह बहुत बड़ी जरूरत है कि ऐसा कानून बने जिससे इनके अधिकारों की रक्षा हो, ये कानून के दायरे में हों।

घरेलू सहायकों के साथ अलग लिफ्ट जैसे भेदभाव वाले मुद्दे पर मालीवाल ने कहा कि ऐसी शर्मनाक स्थिति के बाद क्या लगता है कि हमारा भारत इक्कीसवीं सदी में है? हम हर बात पर अमेरिका की ओर देखते हैं। वहां राष्ट्रपति भी आ जाए तो घरेलू सहायकों के साथ सामान्य व्यवहार होता है। आप उनके अधिकारों का हनन नहीं कर सकते हैं। लेकिन भारत में हम अपने से छोटे तबके के लोगों के साथ जमकर भेदभाव करते हैं और सब कोई खामोशी से इसे मंजूर भी करते हैं। इतनी छोटी सोच रखने वाला समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता। मालीवाल ने बताया कि महागुन मामला सामने आने के बाद नोएडा से लेकर दिल्ली और गुड़गांव के लोगों ने दिल्ली महिला आयोग से संपर्क शुरू किया। हमें फोन आने लगे, ईमेल और ट्वीट आने लगे। यह हमारे लिए मुश्किल हो गया। हमारे पास संसाधन हैं, विषय की समझ है लेकिन हम इस मामले में दखल नहीं दे सकते क्योंकि यह नोएडा (उत्तर प्रदेश) में होने के कारण हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर था। लेकिन हम सिर्फ इसलिए चुप नहीं बैठ सकते थे कि यह हमसे कुछ किलोमीटर की दूरी नोएडा में है।

स्वाती मालीवाल ने कहा कि इस मामले में हमने सिर्फ यही किया कि एक टीम भेजी। टीम ने आरोपी जोहरा बीबी से मुलाकात की, उन्हें पुलिस थाने ले गई और प्राथमिकी दर्ज कराई। हमने अपनी टीम भेजी। उस टीम ने सिर्फ यह किया कि उस महिला को लेकर पुलिस स्टेशन गई और उसका बयान दर्ज करा कर प्राथमिकी दर्ज कराई। उस लड़की के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। लोग हम पर आरोप लगाने लगे कि हम बांग्लादेशी का पक्ष ले रहे हैं। लेकिन मेरा कहना है कि प्राथमिकी दर्ज हुई तो जांच होगी कि कौन गलत है और कौन सही है। हमने यह तो नहीं कहा कि जोहरा बीबी ही सही है। लेकिन यह पुलिस जांच के बिना यह साबित कैसे होगा कि कौन सही है। हमारी टीम की मदद से महिला ने प्राथमिकी दर्ज भर करवाई है। लेकिन विडंबना यह है कि लोग इसे बांग्लादेशी मुसलमान का मामला बनाने पर तुले थे।

घरेलू हिंसा कानून के दुरुपयोग के सवाल पर मालीवाल ने कहा कि दुरुपयोग तो बहुत से कानूनों का होता है। सूचना अधिकार कानून से लेकर आयकर कानून तक पर दुरुपयोग के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन अगर घरेलू हिंसा, दहेज हत्या या बलात्कार के इक्का-दुक्का मामले सामने आते हैं तो यह जंगल की आग की तरह फैला दी जाती है, और माहौल बनाया जाता है कि ये सारे मामले फर्जी होते हैं, लेकिन लड़Þकी को जिंदा जला दिया जाता है तो उस पर चुप्पी साध ली जाती है। मालीवाल ने कहा कि यह सच है कि बलात्कार का एक भी झूठा केस महिला अधिकारों की लंबी और सच्ची लड़ाई को कमजोर करता है। दहेज हत्या या बलात्कार के झूठे आरोप लगने के बाद पुरुष का जीवन भी तबाह हो जाता है। और, इसका उपाय है तेज न्यायिक प्रक्रिया।

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