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सृजन घोटाला: एडीएम रैंक के अधिकारी ने किया सरेंडर, सीबीआई ने रख रखा था इनाम

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घोटाले के आरोपी और सीबीआई का इनामी राजीव रंजन ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

सृजन का आरोपी राजीव रंजन ने किया सरेंडर

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घोटाले के आरोपी और सीबीआई का इनामी राजीव रंजन ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जिसे सीबीआई के विशेष जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने पटना की बेऊर जेल भेज दिया। ये एडीएम रैंक के भागलपुर में भूअर्जन अधिकारी थे। और इनके रहते महकमा के दो सौ सत्तर करोड़ रुपए सरकारी धन सृजन महिला विकास सहयोग समिति के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था। जहां से खाताधारकों ने निकाल गायब कर दिया। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने इस सिलसिले में 2017 में एफआईआर दर्ज कर इन्हें आरोपित बनाया था। मगर सृजन घपला उजागर होने के बाद ही वे फरार हो गए।

इनके साथ सीबीआई ने अपनी जांच में बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार सिंह, सहायक प्रबंधक वरुण कुमार , इंडियन बैंक के लिपिक अजय कुमार पांडे, भूअर्जन महकमा के नाजिर राकेश कुमार झा , सृजन महिला विकास सहयोग समिति की प्रबंधक सरिता झा को आरोपित किया है। और ये सभी जेल में बंद है। सीबीआई ने चार फरार आरोपियों पर हाल ही में नकद पच्चीस हजार रुपए इनाम की घोषणा की थी। जिनमें एक राजीव रंजन भी थे। इस बाबत बाकायदा इश्तहार देकर फरार चारों आरोपियों की फोटो छापी थी।

राजीव रंजन के आत्मसमर्पण के बाद तीन आरोपियों को सीबीआई ढूंढ रही है। जिनमें इंदु गुप्ता , अमित कुमार और रजनी प्रिया है। इंदु गुप्ता सृजन घपले में आरोपी जेल में बंद अरुण कुमार की पत्नी है। इनके भागलपुर फ्लैट पर अगस्त 2017 को पुलिस का छापा पड़ा था। उस वक्त इनके पति तो गिरफ्तार कर लिए गए थे। मगर वह फरार होने में कामयाब रही। अरुण कुमार भी डिप्टी कलेक्टर रैंक के कल्याण महकमा के अधिकारी थे। इस महकमा के भी सैकड़ों करोड़ रुपए बैंकों से सृजन के खाते में गए। और गायब है। सरकार ने इन्हें मुअत्तल कर दिया है। फिलहाल ये पटना की बेउर जेल में इसी आरोप में बंद है।

जानकार बताते है कि हैरत की बात यह है कि इंदु गुप्ता के नाम वाले बंधक बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपए जमा मिले। जिसे फरार होने के दौरान वह निकालना चाह रही थी। मगर तबके वरीय पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार की ततपरता से वह रकम नहीं निकाल सकी। उन्होंने खाते पर रोक लगवा दी थी। साथ ही 25 लाख रुपए का एक चेक भी छापा मारने के दौरान पुलिस को मिला था। जो सृजन महिला विकास सहयोग समिति ने उनके नाम उन्हें दिया था। जिसे पत्रकारों को एसएसपी ने दिखाया था।

दूसरी आरोपी है रजनी प्रिया। यह सृजन की संस्थापक मनोरमा देवी की पुत्र बधू है। मनोरमा देवी के निधन के बाद यह ही सृजन एनजीओ की सचिव बनी। तीसरे आरोपी है इनके पति व मनोरमा का बेटा अमित कुमार। यह सृजन का आर्थिक सलाहकार था। और कोचिंग चलाता था। बताते है कि डिप्टी कलेक्टर राजीव रंजन को सरकारी धन की हेराफेरी करवाने के एवज में अमित ने एक फ्लैट दिलवाया था। उस फ्लैट के रजिस्ट्री के कागजात छापे के दौरान पुलिस को अमित के कोचिंग सेंटर से मिले थे। अमित और इनकी पत्नी रजनी घोटाला उजागर होने के दिन से ही फरार चल रहे है। इनके तिलकामांझी वाला आलीशान मकान यूं ही पड़ा है।

जानकार बताते है कि अमित कुमार और इनकी पत्नी रजनी प्रिया गिरफ्त में आने के बाद सीबीआई सृजन से जुड़ी अनसुलझी पहेली सुलझाने में कामयाब हो सकेगी। इसके राजनैतिक कनेक्शन और उपकृत हुए पत्रकारों व दूसरे लोगों का छिपा राज भी सामने आ सकेगा।

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