योगी राज में CMO का फोन तक नहीं उठाते बड़े आलाधिकारी! DM समेत 25 अफसरों को नोटिस

खास बात यह है कि राजधानी लखनऊ, पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, मुख्यमंत्री का गृहनगर गोरखपुर, प्रयागराज और अलीगढ़ जैसे बड़े मंडलों के आयुक्तों (कमिश्नर) ने सीएम कार्यालय के फोन को तवज्जों नहीं दिया।

ALLAHABAD HC, YOGI GOVERNMENT, PANCHYAT ELECTION, CORONA, DEATH OF 135 TEACHERSमोबाइल पर बात करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

प्रशासनिक अफसर फोन नहीं उठाते हैं। सीयूजी नंबर पर भी बात नहीं करते हैं। जनसमस्या को नहीं सुनते हैं। ऐसे आरोप अक्सर जनप्रतिनिधि लगाते रहे हैं। कई बार इसकी शिकायत मंत्रियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची। विधानसभा और विधान परिषद में भी इस मुद्दे को लेकर कई बार चर्चा की गई। ऐसी लापरवाही के लिए अफसरों को फटकार भी लग चुकी है। इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने सतर्कता दिखाते हुए हाल ही में सीएम के निर्देश पर अफसरों का टेस्ट लिया तो परिणाम चौंकाने वाले आए।

कई बड़े अफसर, कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और एसपी ने न तो फोन उठाया और न ही कॉल बैक किया। कुछ अन्य अफसरों के पीआरओ ने फोन रीसीव किया। दो चार अफसरों ने काल बैक भी किया। फोन नहीं उठाने वालों में लखनऊ और प्रयागराज के कमिश्नर भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसको गंभीरता से लिया है। कार्मिक, नियुक्ति और गृह विभाग ने 25 से अधिक अफसरों को नोटिस जारी कर जवाबतलब किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय का फोन नहीं उठाना यह दर्शाता है कि इन अफसरों के सीयूजी मोबाइल में वह नंबर भी फीड नहीं है।

खास बात यह है कि राजधानी लखनऊ, पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, मुख्यमंत्री का गृहनगर गोरखपुर, प्रयागराज और अलीगढ़ जैसे बड़े मंडलों के आयुक्तों (कमिश्नर) ने सीएम कार्यालय के फोन को तवज्जों नहीं दिया। आगरा, मेरठ और आजमगढ़ मंडल के आयुक्तों का तो फोन ही नहीं मिला। कानपुर मंडल का फोन उनके जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने उठाया।

कुछ ऐसा ही हाल जिलाधिकारियों का भी रहा। कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरैया, गोरखपुर, अलीगढ़, आजमगढ़, मऊ, कुशीनगर, झांसी, जालौन, अमरोहा, उन्नाव, आगरा, इटावा के जिलाधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय का फोन रीसीव करना उचित नहीं समझा। फिरोजाबाद के डीएम की जगह उनके पीआरओ ने उठाया। इसके अलावा लखीमपुर, रायबरेली और सीतापुर के जिलाधिकारियों ने भी फोन नहीं उठाया, लेकिन बाद में इनका कॉल बैक जरूर आया था।

आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, प्रयागराज, कानपुर, इटावा, कन्नौज, औरैया, कुशीनगर, जालौन, मेरठ, शामली, रायबरेली जिलों के पुलिस कप्तानों ने भी ऐसा ही रुख अपनाया और फोन उठाना उचित नहीं समझा। गोरखपुर के पुलिस कप्तान का फोन उनके पीआरओ ने उठाया। जबकि ललितपुर व कासगंज के पुलिस कप्तानों का फोन कनेक्ट ही नहीं हो पाया। गाजीपुर और जौनपुर के पुलिस कप्तानों ने फोन रीसीव तो नहीं किया, लेकिन बाद में कॉल बैक जरूर किया।

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