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लोकसभा अध्यक्ष व आठ सांसदों को राज्य अधिवक्ता परिषद का नोटिस

अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के मुताबिक, किसी दूसरे काम से आय करते हुए अधिवक्ता सनद कायम रखना अधिनियम के मुताबिक गलत है।

Author भोपाल | April 4, 2016 23:33 pm
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन (पीटीआई फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद (एसबीसीएमपी) ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समेत प्रदेश के आठ सांसदों को नोटिस जारी पांच मई तक जवाब देने को कहा है। इन सांसदों को अधिवक्ता सनद निलंबन के लिए नोटिस जारी किया गया है। ये सांसद कानूनी पेशे में अब नहीं हैं और अन्य कामों से आय करने के बावजूद अपनी अधिवक्ता सनद कायम रखे हुए हैं जो अधिवक्ता अधिनियम के मुताबिक गलत माना गया है। परिषद की अपील समिति के अध्यक्ष शिवेंद उपाध्याय ने बताया कि बार काउंसिल आफ इंडिया के प्रावधानों के मुताबिक, चैप्टर सात के नियम 47 में बिना अपनी अधिवक्ता सनद निलंबित रखते हुए कानूनी पेशा में नहीं रहने और अन्य काम करने वाले व्यक्ति की ओर से अपनी अधिवक्ता सनद कायम रखने पर प्रतिबंध है।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के मुताबिक, किसी दूसरे काम से आय करते हुए अधिवक्ता सनद कायम रखना अधिनियम के मुताबिक गलत है। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को परिषद के जबलपुर स्थित मुख्यालय से ई-मेल के जरिए रविवार को नोटिस भेजा गया है और इसकी एक प्रति उन्हें डाक से भी भेजी गई है। इसमें सांसदों से पांच मई 2016 तक जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि यदि इन सांसदों की ओर से नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो परिषद अगली कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखेगी।

उपाध्याय ने बताया कि परिषद की ओर से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के अलावा रतलाम से सांसद कांतिलाल भूरिया, शहडोल से सांसद दलपत सिंह परस्ते, सीधी से सांसद रीति पाठक, भोपाल से सांसद आलोक संजर, रीवा से सांसद जर्नादन प्रसाद मिश्रा, सतना से सांसद गणेश सिंह और राज्यसभा सांसद सत्यनारायण जटिया को नोटिस भेजा गया है। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने प्रकाश सिंह बादल मामले में लोकसभा, राज्यसभा और प्रदेश विधानसभा के सदस्यों को लोक सेवक ही माना है। उन्होंने कहा कि सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष के रूप में वेतन पा रही हैं। साथ ही अधिवक्ता के रूप में सनद भी कायम रखे हुए हैं, जो कि नियम खिलाफ है। इसी तरह सांसद भी लोकसेवक के तौर पर वेतन हासिल कर रहे हैं और साथ ही अपनी अधिवक्ता की सनद भी कायम रखे हैं। उपाध्याय ने कहा कि यह मामला समिति के सामने तब आया जब बार काउंसिल आॅफ इंडिया के प्रावधानों के मुताबिक, अधिवक्ताओं की सनद का नवीनीकरण किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि राज्य अधिवक्ता परिषद प्रदेश विधानसभा के ऐसे सदस्यों की पहचान भी कर रही है जो अधिवक्ता के तौर पर अपनी सनद भी साथ में कायम किए हुए हैं।

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