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सरवाना भवन के डोसा किंग पी राजगोपाल का निधन, मर्डर केस में उम्रकैद मिलने के बाद आया था हार्ट अटैक

मशहूर साउथ इंडियन फूड चेन सरवाना भवन के फाउंडर व डोसा किंग पी राजगोपाल का निधन हो गया। चेन्नई के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

Author चेन्नई | July 18, 2019 11:49 AM
सरवाना भवन के डोसा किंग पी राजगोपाल (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

मशहूर साउथ इंडियन फूड चेन सरवाना भवन के फाउंडर व डोसा किंग पी राजगोपाल का निधन हो गया है। चेन्नई के एक अस्पताल में उन्होंने गुरुवार (18 जुलाई) सुबह अंतिम सांस ली। बता दें कि हत्या के एक मामले में उम्रकैद मिलने के बाद उन्हें हार्ट अटैक पड़ा था, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

2 दिन पहले अस्पताल में हुए थे भर्ती: बता दें कि अपने ही एक कर्मचारी की हत्या के मामले में पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कई बीमारियों से जूझ रहे राजगोपाल को मद्रास हाई कोर्ट ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी थी, जिसके बाद मंगलवार (16 जुलाई) को उन्हें जेल से अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।

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शनिवार से ही बिगड़ रही थी हालत: डॉक्टरों के मुताबिक, राजगोपाल की तबीयत शनिवार (13 जुलाई) से ही बिगड़ने लगी थी। वह डायबीटीज, हाईपरटेंशन व किडनी संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे और उनकी हालत काफी ज्यादा खराब हो गई थी। स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के आरएमओ पी रमेश के मुताबिक, किडनियों के काम नहीं करने के चलते राजगोपाल को आईसीयू में एडमिट किया गया था। वह 2 दिन से वेंटिलेटर पर थे।

इस वजह से कातिल बन गए राजगोपाल: बता दें कि अपने ही कर्मचारी की हत्या के मामले में राजगोपाल को 2001 में आरोपी बनाया गया था। बताया जाता है कि वह अपने कर्मचारी प्रिंस सांताकुमार की पत्नी जीवाज्योति से तीसरी शादी करना चाहते थे। हालांकि, जीवाज्योति ने उनके प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद राजगोपाल ने सांताकुमार की हत्या करा दी थी।

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2004 में सुनाई गई 10 साल की सजा: सेशन कोर्ट ने 2004 में राजगोपाल को दोषी करार दिया था। साथ ही, 10 साल की सजा सुनाई थी। राजगोपाल ने इस फैसले के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में अपील की थी। 2009 में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने 10 साल कैद की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत: इसके बाद राजगोपाल ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में फैसला सुनाते हुए मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही, सरेंडर करने की तारीख 7 जुलाई तय की थी। राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर करने के लिए कुछ और वक्त मांगा, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही, तत्काल प्रभाव से सरेंडर करने का आदेश दिया था।

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