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शारदा चिटफंडः 2019 चुनाव से पहले फिर सियासी तहलका मचा रहे घोटाले में कब-क्या हुआ, ये है पूरी टाइमलाइन

शारदा चिटफंडः ये नाम अब ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी मुसीबतों में शुमार हो गया है। हालांकि उन्होंने एक बयान में कहा था कि इस कंपनी की शुरुआत वामपंथी सरकार के दौरान हुई थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो सोर्स : Express Group Photo)

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले देश में तहलका मचा रहे पश्चिम बंगाल के चिटफंड घोटाले के सामने आने की शुरुआत 2013 में हुई थी। जांच के शुरुआती दिनो में सरकारी आंकड़ों के हवाले से लिखी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो हजार करोड़ के इस घोटाले में अब तक कई बड़े चेहरे नप चुके हैं। कुछ रिपोर्ट्स में इस घोटाले के अब तक करीब 4000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की बात कही गई है। इनमें से निवेशकों को सिर्फ 477 करोड़ रुपए लौटाए गए, जबकि 820 करोड़ रुपए का कमीशन मार्केटिंग एजेंट्स को दिया गया। जांच की शुरुआत यूपीए सरकार के दौरान ही हो गई थी। शारदा और रोजवैली ये दो नाम अब ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी मुसीबतों में शुमार हो गए हैं। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने एक बयान में कहा था कि इस कंपनी की शुरुआत वामपंथी सरकार के दौरान हुई थी।

– 2009 में सबसे पहले सांसद सोमेंद्र नाथ मित्रा, अबु हसीम खान चौधरी और तत्कालीन उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री साधन पांडे ने इस संबंध में आवाज उठाई थी। इसी साल बाजार नियामक संस्था सेबी ने इस मामले को संज्ञान में लिया।

– ET की रिपोर्ट के मुताबिक पोंजी स्कीमों के जरिये जुटाई गई करीब 988 करोड़ रुपए की रकम से मीडिया में निवेश किया गया। इसके अखबारों और चैनलों में करीब 1500 पत्रकारों को नौकरी दी गई।

– 17 अप्रैल 2013 के दिन शारदा के करीब 600 कलेक्शन एजेंट्स ने टीएमसी ऑफिस के बाहर एकजुट होकर कार्रवाई की मांग की।

– इसके एक हफ्ते बाद ही सेबी ने शारदा ग्रुप के और पैसे जुटाने पर रोक लगा दी और सुदीप्तो सेन और देबजानी मुखर्जी को गिरफ्तार किया।

– 2014 में ही शारदा घोटाले की जांच के लिए IPS राजीव कुमार (वर्तमान कोलकाता पुलिस कमिश्नर) के नेतृत्व में SIT बनाई गई।

– अप्रैल 2014 में ही मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने सीबीआई को पूर्वी भारत में चल रही शारदा समेत अन्य पोंजी स्कीमों की जांच का आदेश दिया।

– सीबीआई ने SIT प्रमुख राजीव कुमार पर दस्तावेज गायब करने का आरोप लगाया।

– निवेशकों के पैसे से ग्रुप की शारदा टूर एंड ट्रैवल्स, शारदा रियल्टी, शारदा हाउसिंग और शारदा गार्डन, रिसॉर्ट्स और होटल्स ने जुटाई गई रकम से काफी ज्यादा की कमाई की।

– फुटबॉल क्लब्स से दुर्गा पूजा के कार्यक्रमों तक में पैसा लगाने को लेकर शारदा ग्रुप चर्चा में रहा।

– अप्रैल 2013 में शारदा ग्रुप के बंद होने से पहले 239 निजी कंपनियों वाले इस समूह ने करीब 17 लाख निवेशकों से 1983 करोड़ रुपए की रकम जुटाई थी। इस रकम का करीब 90 फीसदी पैसा कभी बैंकों में गया ही नहीं। करीब 80 फीसदी पैसा निवेशकों को वापस ही नहीं लौटाया गया।

– 2014 में बॉलीवुड अभिनेता और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मिथुन चक्रवर्ती से करीब आठ घंटे तक ईडी ने पूछताछ की।

– 2015 में शारदा समूह की एक मीडिया यूनिट के ब्रैंड एंबैसडर रहे मिथुन ने ईडी को 1.19 करोड़ रुपए की रकम लौटा दी। उन्होंने कहा था कि उनके संबंध पूरी तरह से पेशेवर हैं, धोखाधड़ी का उनका इरादा नहीं था।

– मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बार शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर कई बार बवाल हुआ है। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव 2016 और अब लोकसभा चुनाव के समय इस मामले में राजनीति करने के आरोप लगे हैं।

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