सम्राट चौधरी ने बुधवार को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सम्राट बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। सम्राट चौधरी की सरकार में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं- विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को बतौर उप-मुख्यमंत्री शामिल किया गया।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार ने X पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी। नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट में कहा, “आज बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर श्री सम्राट चौधरी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा।”

किसे मिला कौन सा मंत्रालय?

विजय चौधरी बोले- नीतीश मॉडल के साथ आगे बढ़ेगा गठबंधन

उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जदयू के विजय कुमार चौधरी ने कहा कि उन्होंने डिप्टी सीएम के रूप में जो शपथ ली है, वह नीतीश कुमार के विश्वास का परिणाम है और राज्य में उनकी नीतियों व कार्यशैली को आगे बढ़ाया जाएगा।

विजय चौधरी ने कहा, “मैं नीतीश कुमार के प्रति आभार प्रकट करता हूं। उनके विश्वास के कारण ही मुझे यह जिम्मेदारी मिली है। उनके जो रास्ते, नीतियां, कार्यक्रम और कार्यशैली हैं, हम उसी पर आगे बढ़ेंगे।” 

उन्होंने कहा कि बिहार के विकास मॉडल में पहले भी बीजेपी शामिल रही है और वर्तमान में भी गठबंधन उसी दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा “अब तक नीतीश कुमार का जो मॉडल था, उसमें भाजपा भी थी। अभी तुलना की कोई बात नहीं है। बिहार के मॉडल में नीतीश कुमार भी हैं, बीजेपी भी है और अन्य सहयोगी दल भी हैं।”

सम्राट चौधरी कौन हैं? 5 पॉइंट्स में जानिए

  1. सम्राट चौधरी ने साल 2017 में बीजेपी का दामन थामा। इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक राजद में रहे और करीब दो वर्ष तक नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में रहे।
  2. सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी पूर्व सैनिक थे। बाद में वह सियासत में आ गए। शकुनी चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी और बाद में अलग-अलग समय में लालू प्रसाद तथा नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे।
  3. सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में की थी। राजद के वर्ष 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद भी वह लंबे समय तक इस पार्टी के साथ बने रहे, लेकिन 2014 में एक बागी धड़े के साथ जदयू में शामिल हो गए, जब जीतन राम मांझी राज्य के मुख्यमंत्री थे।
  4. तीन वर्ष बाद उन्होंने जदयू छोड़कर बीजेपी का रुख किया, जहां उन्हें एक प्रभावशाली वक्ता और कोइरी समुदाय के प्रमुख नेता के रूप में पहचान मिली। उन्हें बीजेपी की राज्य इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया, विधान परिषद का सदस्य बनाया गया और बाद में 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी सरकार में मंत्रिमंडल में स्थान मिला।
  5. मार्च 2023 में सम्राट चौधरी बीजेपी कर राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। कभी नीतीश कुमार के मुखर आलोचक रहे सम्राट चौधरी ने 2022 में जद(यू)-बीजेपी अलग होने के बाद पगड़ी पहनने का संकल्प लिया था और कहा था कि वह इसे मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने के बाद ही उतारेंगे। हालांकि, बाद में वह नीतीश के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए।

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मीडिया से बातचीत में विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्होंने भाजपा का सिपाही होने के नाते अपने कमांडर के आदेश के अनुसार सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें