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राज्यसभा में भी कम होगी समाजवादी पार्टी की ताकत

लोकसभा चुनाव में महज पांच सीटों पर सिमटने और उत्तर प्रदेश की सत्ता गंवाने के बाद समाजवादी पार्टी की ताकत राज्यसभा में भी कम होने जा रही है।

लखनऊ | Updated: March 2, 2018 10:26 AM

लोकसभा चुनाव में महज पांच सीटों पर सिमटने और उत्तर प्रदेश की सत्ता गंवाने के बाद समाजवादी पार्टी की ताकत राज्यसभा में भी कम होने जा रही है। उत्तर प्रदेश की दस सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा सांसदों के चुनाव में समाजवादी पार्टी को कम से कम पांच सीटों का नुकसान होना तय है। भारतीय जनता पार्टी को इस मर्तबा बड़ा लाभ होगा। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए चुनाव होने हैं। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के छह राज्यसभा सांसद हैं। विधानसभा चुनाव में सिर्फ 47 सीटें जीतने की वजह से समाजवादी पार्टी को पांच सीटों का नुकसान होना तय है।

जबकि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी बिना किसी सहारे के प्रदेश से अपना एक भी प्रत्याशी जिता पाने की स्थिति में नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के 325 विधायकों के जीतने की वजह से उसे कम से कम आठ सदस्यों को उच्च सदन में भेजने का मौका मिलेगा। लेकिन इस मौके ने भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पार्टी के निशान पर उच्च सदन तक पहुंचने के दावेदारों की संख्या अधिक होने की वजह से भाजपा आलाकमान इस बात पर लगातार मंथन कर रहा है कि आखिर वह किन प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजे?

समाजवादी पार्टी ने छह बरस पहले राज्यसभा में अपने छह सदस्यों को भेजा था। इनमें पश्चिम बंगाल के किरणमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश अग्रवाल, जया बच्चन, चौधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी के नाम शामिल थे। लेकिन इस बार इनमें से किसी एक को ही समाजवादी पार्टी उच्च सदन में भेजने में समर्थ है। इस वजह से सपा में इस बात को लेकर गहन मंथन जारी है कि आखिर वो इन छह में से किस एक को राज्यसभा भेजे। समाजवादी पार्टी के अलावा बहुजन समाज पार्टी के दो सदस्य राज्यसभा में हैं। इनमें से बसपा प्रमुख माायावती पहले ही इस्तीफा दे चुकी हैं। बसपा के एक राज्यसभा सांसद मुनकाद अली का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वहीं कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और भाजपा के विनय कटियार का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। बसपा के 19 और कांग्रेस के 7 विधायक होने की वजह से दोनों मिल कर भी किसी एक को उच्च सदन तक भेजने की स्थिति में नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश की दस में से नौ सीटों पर भाजपा और सपा अपने उम्मीदवार भेजेगी। लेकिन दसवीं सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा। बसपा, सपा और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती अपने विधायकों की क्रास वोटिंग को रोकना है। क्योंकि ऐसा होने पर इसका सीधा लाभ सत्ताधारी भाजपा को हो सकता है।
भारतीय जनता पार्टी में समाजवादी पार्टी से आये यशवंत सिंह, अशोक बाजपेयी, सरोजनी अग्रवाल, बुक्कल नवाब के अलावा बसपा के जयवीर सिंह समेत कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो उच्च सदन तक पहुंचने की आस लगाए हैं।

इनमें सपा छोड़ कर आए नेताओं ने विधान परिषद से त्यागपत्र देकर भाजपा के पक्ष में अपनी वफादारी का इम्तहान पहले ही दे दिया है। उत्तर प्रदेश में मार्च में होने जा रहे राज्यसभा की खाली दस सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा का पलड़ा अभी भारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नौ सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जिताने की रणनीति तैयार की है।

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