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उधार लेकर घी पिलाने की कोशिश में समाजवादी सरकार

अंशुमान शुक्ल उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार चीर्वाक के सिद्धांतों पर चल रही है। ‘यावत जीवेत, सुखम जीवेत। ऋणम कृत्वा, घृतम पीवेत’ का चार्वाक का सिद्धांत प्रदेश की सपा सरकार ने अपना लिया है। जब तक जिएंगे सुख से जिएंगे, कर्ज लेंगे और घी पिएंगे के चार्वाक के इस सिद्धांत को अमल में […]

Author March 15, 2015 8:47 AM
अखिलेश ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य के किसानों के लिए कुछ नहीं कर रही है।

अंशुमान शुक्ल

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार चीर्वाक के सिद्धांतों पर चल रही है। ‘यावत जीवेत, सुखम जीवेत। ऋणम कृत्वा, घृतम पीवेत’ का चार्वाक का सिद्धांत प्रदेश की सपा सरकार ने अपना लिया है। जब तक जिएंगे सुख से जिएंगे, कर्ज लेंगे और घी पिएंगे के चार्वाक के इस सिद्धांत को अमल में लाते हुए तीन वर्ष में उत्तर प्रदेश 2.66 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में डूब चुका है। दुखद यह है कि इस कर्ज पर यह बीमारु राज्य 18 हजार 636 करोड़ 80 लाख रुपए का ब्याज भी भर रहा है। बावजूद इसके अपनी सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर अखिलेश यादव प्रदेश में विकास का दावा करते नहीं अघा रहे हैं। प्रदेश के 42 फीसद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं लेकिन सरकारी दावे विकास की नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश में हैं।

15 मार्च को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से सपा की सरकार बने तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। हर ओर जश्न का माहौल है। इन तीन वर्षों में भारी वित्तीय संकट से जूझ रही अखिलेश यादव की सरकार ने 2.66 लाख करोड़ रुपए का ऋण ले रखा है। इस ऋण की वापसी के लिए ढांचागत विकास कैसे हो? अब तक धरातल पर इससे संबंधित योजनाएं नहीं उतर सकी हैं। 15 मार्च 2012 को उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद अखिलेश यादव ने प्रदेश को विकास की राह पर ले जाने के तमाम वादे किए। एक लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रदेश में लाने का सब्जबाग यहां की जनता को दिखाया। लेकिन लचर कानून व्यवस्था और सुस्त सरकारी चाल की वजह से वर्ष 2012-13 में वे 11 हजार 872 करोड़ 58 लाख रुपए का निवेश ही यहां ला पाए। जबकि वर्ष 2013 से सितंबर 2014 के बीच 14 हजार 602 करोड़ 85 लाख रुपए का निवेश उत्तर प्रदेश में आ पाया। यानी प्रदेश सरकार जितना ऋण पर सालाना ब्याज अदा कर रही है, निवेश उससे बेहद कम हुआ। इस वर्ष भी पचास हजार करोड़ रुपए के निवेश के सरकारी दावे किए गए लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। अब तक आठ हजार 700 करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव ही राज्य सरकार को हासिल हो पाए हैं।

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विधानसभा चुनाव के दौरान क्रांति रथ पर सवार अखिलेश यादव ने प्रदेश के करीब 40 लाख बेरोजगारों से वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो बेरोजगारों को रोजगार के नए अवसर तलाश कर दिए जाएंगे। इंटर पास करने वाले सभी छात्रों को लैपटॉप के सपने दिखाए गए। लेकिन प्रदेश में उम्मीद के मुताबिक निवेश न आ पाने की वजह से बेरोजगारों का सपना तीन बरस के बाद भी साकार नहीं हो पाया। वर्ष 2012 में 14 लाख आठ हजार युवकों को मुफ्त लैपटॉप बांटे गए। जबकि उसी साल 23 लाख 31 हजार 230 छात्रों ने इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2013 में 12वीं पास बच्चों को लैपटॉप वितरित करने के लिए 3926 करोड़ रुपए का बजट आबंटित हुआ था पर सरकार इसका सिर्फ 700 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई थी। 2013 में भी उत्तर प्रदेश बोर्ड से 23 लाख, 62 हजार, 262 छात्रों ने और 2014 में 28 लाख,10 हजार, 992 छात्रों ने इंटर की परीक्षा पास की। इस हिसाब से देखा जाए तो 61 लाख से अधिक इंटर पास छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप का इंतजार था जिसे किसी भी हाल में हकीकत में तब्दील कर पाना अखिलेश यादव और उनकी सरकार के बस की बात नहीं थी। वह हकीकत की शक्ल अख्तियार भी नहीं कर पाया। अब ये सभी छात्र प्रदेश सरकार से नाराज बताए जाते हैं। रही हाईस्कूल पास छात्रों को टैबलेट वितरित करने की बात तो इसके आकार लेने की कोई संभावना नहीं है।

बीमारुराज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश में विकास कितना गति पकड़ सका है, इसकी बानगी प्रदेश के कुपोषित बच्चों की संख्या से पता चलती है। उत्तर प्रदेश में 42 फीसद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। अखिलेश सरकार ने ऐसे बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने का नायाब तरीका खोजा है। प्रदेश के एक लाख 12 हजार 845 स्कूलों में पढ़ रहे 76 लाख 29 हजार बच्चों को आयरन व फोलिक एसिड की गोलिया खिला दी गई हैं। इस बाबत भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक कहते हैं- गजब की विडंबना है। अखिलेश सरकार कुपोषण को जड़ से समाप्त करने का मुकम्मल इंतजाम करने के बजाय गोलिया खिलाकर उसे दूर करने की कोशिश में है। प्रदेश सरकार यह मानने को ही तैयार नहीं है कि यहां के 42 फीसद बच्चे कुपोषित इसलिए हैं कि उनके अभिभावकों के पास अच्था खाना मुहैया करा पाने की सामर्थ्य ही नहीं है।

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने पर बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र कहते हैं, प्रदेश में विकास पूरी तरह ठप है। कानून व्यवस्था का इकबाल समाप्त हो चुका है। बावजूद इसके सरकारी विकास यात्रा का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। अखिलेश सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने पर कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया ने तंज कसते हुए कहा कि विकास जुबानी शक्ल में लखनऊ से निकलता जरूर है लेकिन मौके पर कहीं इसके दर्शन नहीं होते। ऐसा नहीं है कि प्रदेश में विकास नहीं हुआ है। लेकिन वह तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, रामपुर, फिरोजाबाद और आजमगढ़ जिले से आगे बढ़ नहीं पाया है।

रविवार को उत्तर प्रदेश की सपा सरकार अपने तीन वर्ष पूर्ण करने जा रही है। इन तीन वर्षों में उसने प्रदेश के विकास के लिए क्या कदम उठाए? इसका जवाब उसे दो वर्ष बाद प्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनाव में देना है। इसमें दोराय नहीं कि अब तक मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से हजारों योजनाओं का शिलान्यास हुआ है लेकिन उन योजनाओं में कितनी मूर्त रूप अख्तियार कर पार्इं? इसे खुद सरकार को प्रदेश की जनता को बताना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि उत्तर प्रदेश की जनता दावों और हकीकत के बीच का फर्क बखूबी समझती है और उसकी इसी समझ ने प्रदेश में कई राजनीतिक दलों को अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्श पर ला खड़ा किया है।

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