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आलाकमान के सख्त तेवरों के बावजूद सपा में गुटबाजी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की बार-बार दी गई नसीहतों के बावजूद समाजवादियों का खेमा गुटबाजी का शिकार है..

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुखिया मुलायम सिंह यादव। (पीटीआई फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की बार-बार दी गई नसीहतों के बावजूद समाजवादियों का खेमा गुटबाजी का शिकार है। जिला पंचायत के अध्यक्ष की कुर्सी किसी अपने को दिलाने का सपना पाले ऐसे नेता, समाजवादी पार्टी के घोषित उम्मीदवारों का विरोध करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। इस बात का इल्म होने के बाद पार्टी आलाकमान ने बागी तेवर अख्तियार कर चुके सपाइयों को कड़ी चेतावनी देते हुए उन्हें हद में रहने की नसीहत तक दे डाली है।

उत्तर प्रदेश में जिला अध्यक्ष की कुर्सी अपने रक्त संबंधी को दिलाने की चाहत ने कई वरिष्ठ सपाइयों के तेवर तल्ख कर दिए हैं। पार्टी पर दबाव बनाने के लिए जौनपुर से आने वाले प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर जिला पंचायत के सदस्यों का भोज आयोजित कर माहौल तैयार करने की कोशिश जरूर की लेकिन उन्हें इसमें नाकामी ही हाथ लगी। सपा 14 दिसंबर को ही 62 जिला पंचायत अध्यक्षों की सूची जारी कर चुकी है। इस सूची के आने के बाद से पार्टी के नेताओं में बेचैनी है।

जारी की गई सूची में सपा के दो नेताओं के रिश्तेदारों के अलावा अखिलेश मंत्रिमंडल से बर्खास्त हुए मनोज पारस और योगेश की पत्नियों के नाम हैं। लेकिन कई ऐसे मंत्री जो अपने रिश्तेदारों को टिकट मिलने की हसरत पाले थे, टिकट न मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अलीगढ़, मेरठ, झांसी, बांदा, फतेहपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और गाजीपुर में जिन नेताओं ने जिला पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवारी के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की थी, उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। सूत्र बताते हैं कि बहराइच से पार्टी के घोषित प्रत्याशी का विरोध और कोई नहीं, अखिलेश सरकार के एक मंत्री खुद कर रहे हैं।

जिन नेताओं के रिश्तेदारों को जिला अध्यक्ष का उम्मीदवार बनाने पर सपा आलाकमान राजी हुआ है उनमें इटावा से मुलायम सिंह यादव के पौत्र अभिषेक यादव, बाराबंकी से मंत्री अरविंद सिंह गोप के भाई ओम प्रकाश सिंह, मेरठ से समाजवादी छात्रसभा के अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान, हमीरपुर से सांसद धर्मेंद्र यादव की रिश्तेदार वंदना यादव, बस्ती से मंत्री राजकिशोर सिंह के पुत्र देवेंद्र सिंह, बिजनौर से मनोज पारस की पत्नी नीलम पारस, गाजियाबाद से विधान परिषद सदस्य आशू मलिक के भाई नूर हसन और शामली से चौधरी वीरेंद्र सिंह की पुत्रवधू शेफाली चौहान शामिल हैं। जबकि जौनपुर से मंत्री पररस नाथ यादव के परिवार के तीन सदस्यों के जिला पंचायत सदस्य चुने जाने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट हासिल करने की उनकी हसरत अधूरी ही रह गई।

मंत्री शाहिद मंजूर भी बेटे को मेरठ से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का सपना पाले थे लेकिन पार्टी ने उनके सपने को आकार नहीं दिया। सूत्र बताते हैं कि विधायक रामपाल यादव बेटे को सीतापुर से टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन नाकाम रहे। वहीं विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पत्नी के लिए, पूर्व सांसद राकेश सचान फतेहपुर से पत्नी के लिए, विधायक राजू यादव मैनपुरी से पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे लेकिन सपा आलाकमान ने उनकी एक नहीं सुनी। जबकि सुलतानपुर और बांदा के प्रत्याशी पार्टी का टिकट वापस करने की ख्वाहिश पहले ही सपा आलाकमान को जता चुके हैं।

समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे रस्साकशी के इस खेल पर मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव पैनी नजर रखे हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि जिला अध्यक्ष के चुनाव में किसी भी तरह की भीतरी गड़बड़ी को रोकने के लिए आलाकमान निगाहें चौकस किए है। सूत्र बताते हैं कि शिवपाल यादव, अपनों को ऊंची कुर्सी दिला पाने में नाकाम रहे नेताओं को चेतावनी दे चुके हैं। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि कई नेता जिला अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने के लिए भितरघात का सहारा ले सकते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आखिर ऐसे कितने भितरघात की जद में आते हैं जिनपर जिला अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के तहत कार्रवाई की जाती है।

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