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गवर्नर के हमले के बाद आजम के बचाव में आई सपा, कहा-चरित्र हनन में जुटी सांप्रदायिक ताकतें

समाजवादी पार्टी ने आजम खां का बचाव करते हुए राज्यपाल पर पलटवार किया है और तल्ख लहजे में कहा कि खां की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना अनुचित है

गवर्नर के हमले के बाद आजम के बचाव में आई सपा, कहा-चरित्र हनन में जुटी सांप्रदायिक ताकतें
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर खां की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस बारे में उन्हें मुख्यमंत्री से विचार करना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री आजम खां की कथित विवादित टिप्पणी पर राज्यपाल राम नाईक के तल्ख रुख के बाद शनिवार को राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव बढ़ गया। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने खां का बचाव करते हुए राज्यपाल पर पलटवार किया और तल्ख लहजे में कहा कि खां की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना अनुचित है और ‘साम्प्रदायिकता के सहारे अपनी सियासी रोटियां सेंकने वाली ताकतें उनके चरित्र हनन’ में जुटी हैं।

सपा के प्रान्तीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने यहां कहा ‘‘सपा सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से कुछ तत्व उसकी छवि को बिगाड़ने में लग गये हैं। वे एक ना एक मंत्री को निशाना बनाकर अपनी घटिया मानसिकता का प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले कुछ लोगों ने मंत्री गायत्री प्रजापति को लेकर अनर्गल बयानबाजी की और अब आजम खां को आलोचना का शिकार बनाया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि खां के संसदीय कौशल की प्रशंसा विधानसभा में विपक्ष के नेता भी करते हैं। उनकी प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना किसी भी तरह उचित नहीं है। चौधरी ने कहा ‘‘आजम खां के चरित्र हनन के पीछे वे ताकतें हैं जो साम्प्रदायिकता के सहारे अपनी राजनीति की रोटियां सेंकते हैं।’’ मालूम हो कि प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने संसदीय कार्यमंत्री मोहम्मद आजम खां द्वारा विधानसभा में अपने प्रति की गयी टिप्पणी को परखने के लिये मांगी गयी सामग्री के अवलोकन के बाद विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को शुक्रवार को लिखे पत्र में संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर खां की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस बारे में उन्हें मुख्यमंत्री से विचार करना पड़ेगा।

खां ने गत आठ मार्च को विधानसभा में कहा था कि सदन से पारित किये जाने के बाद भी राज्यपाल नगर निगम संशोधन विधेयक को मंजूरी नहीं दे रहे है। राज्यपाल ने जिस तरीके से साल भर से इस विधेयक को रोक रखा है, उससे ऐसा लगता है कि वे किसी दल विशेष के प्रभाव में काम कर रहे हैं। सदन में अपने बारे में आजम खां द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी को गंभीरता से लेते हुए नाईक ने विधानसभा अध्यक्ष से इस संबंध में असंपादित सीडी और रिकार्डिग की प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा था, जो उन्हें 15 मार्च को उपलब्ध करायी गयी थीं।
इस सामग्री का अवलोकन करने के बाद राज्यपाल ने उन्हें लिखे पत्र में कहा ‘‘प्राप्त असम्पादित एवं सम्पादित मु्िरदत प्रति के अवलोकन से स्पष्ट है कि संसदीय कार्य मंत्री आजम खां द्वारा आठ मार्च 2016 को विधानसभा में राज्यपाल के प्रति की गयी लगभग 60 पंक्ति की टिप्पणी में से 20 पंक्तियां हटा दी गयी हैं।’’

नाईक ने पत्र में कहा ‘‘विधानसभा की कार्यवाही से संसदीय कार्यमंत्री के वक्तव्य की 33 प्रतिशत पंक्तियां हटाना यह दर्शाता है कि उनकी भाषा विधानसभा की गरिमा, मर्यादा और परम्परा के अनुकूल नहीं है। सदन में संसदीय कार्य मंत्री का वक्तव्य संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनकी योग्यता पर प्रश्न चिह्न के समान है। इस विषय पर मुख्यमंत्री जी से मुझे विचार करना पड़ेगा।’’

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