पहाड़ से पलायन रोकने के लिए संत-महात्मा निकालेंगे छड़ी यात्रा

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े द्वारा निकाली जाने वाली प्राचीन छड़ी यात्रा उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के गांवों को एक दूसरे से जोड़ती है और यह यात्रा राज्य के लोगों में आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ उन्हें उनकी प्राचीन संस्कृति से भी जोड़ने का काम करती है।

सांकेतिक फोटो।

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े द्वारा निकाली जाने वाली प्राचीन छड़ी यात्रा उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के गांवों को एक दूसरे से जोड़ती है और यह यात्रा राज्य के लोगों में आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ उन्हें उनकी प्राचीन संस्कृति से भी जोड़ने का काम करती है। पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

दशनामी संन्यासी अखाड़ों के सबसे बड़े पंच दशनाम जूना अखाड़ा के साधु संत उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के सीमावर्ती जिलों से हो रहे पलायन को रोकने और उत्तराखंड को तीर्थाटन पर्यटन से जोड़कर आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए पूरे प्रदेश में व्यापक भ्रमण कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। 20 अक्तूबर बुधवार से यह पौराणिक छड़ी यात्रा शुरू होगी और 10 नवंबर तक जारी रहेगी।

21 दिन की इस यात्रा में पूरे उत्तराखंड में धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ लोगों को पर्वतीय क्षेत्रों में रहने का महत्व बताया जाएगा ताकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती प्रदेश सुरक्षित रहे और आर्थिक रूप से संपन्न हो सके। यह बीड़ा श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में नागा साधुओं ने उठाया है। उत्तराखंड की सीमा चीन और नेपाल से लगती है और इसके पर्वतीय क्षेत्रों में खासकर सीमांत क्षेत्रों में हो रहे पलायन से इस राज्य की सीमाओं को खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस खतरे से लोगों को आगाह करने के लिए साधु संतों ने छड़ी यात्रा को एक बड़ा माध्यम बनाया है।

महंत हरि गिरि महाराज कहते हैं कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, परंतु इस राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पहाड़ खाली हो रहे हैं। सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन से सीमा पर विदेशी आक्रमणों का खतरा बढ़ गया है। इस पलायन को रोकने के लिए प्रत्येक जनपद में मेडिकल कालेज, उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। पिछली त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे पलायन का सर्वेक्षण कराने के लिए पलायन आयोग की स्थापना की थी।

इसने कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए थे और यह बात सामने आई थी कि राज्य बनने के 21 सालों में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से तेजी से पलायन हुआ है। इतना अधिक पलायन आजादी के बात 50 सालों में भी नहीं हुआ। महंत हरिगिरि कहते हैं कि इस छड़ी यात्रा का एक उद्देश्य यह भी है कि जनता को जागरूक किया जाए। उन्हें स्थानीय पारंपरिक उद्योग, काम-धंधा के प्रति आकर्षित किया जाए, ताकि पलायन रूक सकें। उन्होंने राज्य के सभी दलों के नेताओं और सांसदों व विधायकों से अपील की है कि सभी अपनी-अपनी विधानसभा में स्थायी निवास बनाकर रहे और पर्वतीय क्षेत्रों से चुनाव लड़े। मैदानी क्षेत्रों की विधानसभाओं और लोकसभा क्षेत्रों से पर्वतीय मूल के नेता चुनाव लड़ने की बजाए पर्वतीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ेंगे तो जनता भी पलायन नहीं करेगी और जनप्रतिनिधि अपने पर्वतीय क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं को नजदीक से रूबरू हो सकेंगे और उसका आसानी से समाधान कर सकेंगे।

साधु संतों का मानना है कि शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते उत्तराखंड में बाहरी लोगों का एक समूह हावी होता जा रहा है। बाहुबली और बिल्डरों से मिलकर यह समूह औने-पौने दामों में जमीन खरीद कर अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज कहते हैं कि इस पावन पवित्र छड़ी यात्रा का उद्देश्य लोगों में राष्ट्र की एकता, अखंडता व सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार व सामाजिक जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना पैदा करना है।

21 दिनों की यात्रा

पवित्र छड़ी चारों धाम के अतिरिक्त चारों धामों के रास्तों पर स्थित अन्य तीर्थों त्रिजुगीनारायण, तृंगनाथ, भविष्य बद्री, आदि बद्री, नृसिंह मंदिर, आद्य जगदगुरू शंकराचार्य गुफा, सीतामढ़ी, नौटी गांव में श्रीयंत्र होते हुए कुमायूं मंडल में प्रवेश करेगी, जहां बैजनाथधाम, जागेश्वरधाम, सोमेश्वर महादेव, एड़ादेव, खडकेश्वर मंदिर, गरूड़ चट्टी, ज्योतिलिंग बागनाथ मंदिर बागेश्वर, पूर्णागिरि मंदिर, गंगानाथ मंदिर, प्रन्ना देवी नैनीताल के नैना देवी मंदिर, नारायण आश्रम ओमपर्वत, पाताल भुवनेश्वर, हाट काली गंगोलीहाट, दूना गिरि, कालिका मंदिर रानीखेत, बिनसर महादेव, बूढ़ाकेदार, भूमियाथान मासी, गर्जिया माता के दर्शनों के बाद हरिद्वार पहुंचेंगी।

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