उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अस्पताल में 70 साल के राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद जो हुआ, वह रिश्तों की संवेदना पर सवाल खड़ा करता है। एटा के मारहरा निवासी राजकुमार ने अस्पताल में इलाज के दौरान 12 अगस्त को दम तोड़ दिया, लेकिन उनकी मौत के बाद शव लेने के लिए अब तक कोई अपना नहीं पहुंचा।
पुलिस ने शव को 72 घंटे के लिए शवगृह में रखवाया है। 15 अगस्त को यह अवधि पूरी हो जाएगी। इसके बाद भी कोई स्वजन नहीं आया तो पुलिस नियमानुसार उनका अंतिम संस्कार कराएगी। यानी जिस पिता ने कभी परिवार के साथ जीवन बिताया, उनकी आखिरी विदाई के समय भी उनके पास अपना कोई नहीं होगा।
अस्पताल ने रक्तदाता समूह के पदाधिकारियों से मांगी मदद
राजकुमार करीब दो साल से एटा के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। 16 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई और 12 अगस्त को उनकी मौत हो गई। मौत के बाद जब अस्पताल में कोई रिश्तेदार नहीं मिला तो इसकी जानकारी रक्तदाता समूह के पदाधिकारियों को दी गई।
इसके बाद समूह के शरद तिवारी और उनके साथियों ने राजकुमार के परिवार को खोजने की कोशिश शुरू की। उनके पास मिले दस्तावेजों से बेटे कुबेर सक्सेना का नाम और गाजियाबाद का पता मिला। मोबाइल से संपर्क किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बातचीत के दौरान बेटे ने राजकुमार को पहचानने से इनकार किया और बाद में फोन भी नहीं उठाया। अस्पताल के काउंसलर डॉ. मनोज मौर्य ने भी फोन पर बेटे से बात कर उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
वृद्ध की पत्नी के अलावा उनके तीन बेटे और एक बेटी भी हैं
परिवार की तलाश में जुटे लोगों को राजकुमार के भतीजे पंकज सक्सेना से भी संपर्क हुआ। उन्होंने बताया कि राजकुमार के तीन बेटे कुबेर, भारत और धादू गाजियाबाद में रहते हैं। उनकी एक बेटी भी है और पत्नी भी जीवित हैं। रक्तदाता समूह के सदस्य जब दस्तावेजों में दर्ज गाजियाबाद के नंदग्राम, दीनदयालपुर स्थित पते पर पहुंचे तो घर पर ताला लगा मिला।
पड़ोसियों ने बताया कि मकान कुबेर सक्सेना का है। पुलिस ने भी संपर्क की कोशिश की, लेकिन कुबेर वहां नहीं मिले। बेटों की ओर से इस मामले में अब तक कोई प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आया है। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी तरफ से पिता का शव लेने या अंतिम संस्कार में शामिल होने की सहमति नहीं मिली।
राजकुमार के पारिवारिक जीवन को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आई हैं। भतीजे पंकज के अनुसार, राजकुमार के पिता एटा की अदालत में मुंशी थे और परिवार के पास जमीन भी थी। उनके परिवार में पैसों को लेकर विवाद रहने की बात भी सामने आई है। हालांकि ये पारिवारिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल अस्पताल के शवगृह में राजकुमार का शव अपने किसी अपने का इंतजार कर रहा है।
पुलिस की 72 घंटे की मियाद 15 अगस्त को पूरी होगी। इसके बाद अगर कोई स्वजन नहीं पहुंचता है तो पुलिस उनका अंतिम संस्कार कराएगी। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अंतिम संस्कार कौन करेगा, सवाल यह भी है कि एक पिता की जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर उसके अपने रिश्ते आखिर इतने दूर कैसे हो गए।
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