Saharanpur Masjid Controversy: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में विवादित मस्जिद का ढांचा ढहाए जाने के बाद मलबे की सफाई के दौरान रविवार को उसके नीचे एक कुआं मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कुआं लगभग 20 फीट गहरा और 1.5 मीटर चौड़ा है।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, मस्जिद के नीचे मिला यह कुआं उस समय सामने आया जब शनिवार को बुलडोजर कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर से मलबा हटाया जा रहा था। लगभग 16 घंटे तक चली लंबी कार्रवाई के बाद मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया गया था, जिसके बाद रविवार सुबह सफाई का काम जारी था।
कटर से स्लैब काटने पर खुला कुएं का राज
अधिकारियों ने बताया कि रविवार सुबह सफाई के दौरान मलबे के नीचे एक कंक्रीट की स्लैब दिखाई दी। जब कटर की मदद से इस स्लैब को काटा गया, तो उसके ठीक नीचे यह गहरा कुआं निकला।
कुआं मिलने की खबर फैलते ही सहारनपुर के उपजिलाधिकारी (SDM) सुबोध कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने कुएं की प्राचीनता और इसके ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को तुरंत इसकी सूचना दी।
करीब 100 साल पुराना कुआं होने का दावा
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि यह कुआं लगभग एक शताब्दी पुराना प्रतीत होता है। हालांकि, इसकी वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में सही जानकारी पुरातात्विक विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने समय में जल स्रोत और वजू के लिए होता था इस्तेमाल
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने समय में जब नल से पानी की आपूर्ति व्यवस्था नहीं होती थी, तब कुएं ही जल आपूर्ति का मुख्य जरिया हुआ करते थे। इसके अलावा, मस्जिदों में वजू (हाथ-पैर धोने) और स्नान के लिए पारंपरिक रूप से कुओं का उपयोग किया जाता था, यही वजह है कि कई पुरानी मस्जिदों के पास कुएं पाए जाते हैं।
लोहे की चादर से ढका गया
फिलहाल सुरक्षा के उपायों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने इस कुएं को लोहे की चादर से पूरी तरह ढक दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आसपास की मिट्टी या बाकी बचा मलबा कुएं के भीतर न गिरे।
घटनास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती जारी है। आम लोगों या किसी भी बाहरी व्यक्ति को उस स्थान के पास जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
16 घंटे चले में ढहाया गया था ढांचा
इससे पहले शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस मस्जिद के ढांचे को भारी पुलिस और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया था। यह कार्रवाई लगभग 16 घंटे तक लगातार चली थी।
इस विवाद की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बना यह ढांचा पूरी तरह से अवैध है।
अदालत के आदेश के बाद हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
याचिका पर सुनवाई करते हुए सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट ने उक्त ढांचे को अवैध घोषित किया था और इसे गिराने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद मस्जिद प्रबंध समिति ने इस फैसले के खिलाफ जिला अदालत का रुख किया था।
हालांकि जिला अदालत ने 2 सितंबर को मस्जिद प्रबंध समिति की अपील को खारिज कर दिया था। अदालत से राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित इस विवादित ढांचे को हटाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की।
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