उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी इस समय अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। राज्य की राजनीति में एक समय ऐसा भी था जब मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी ने एक-दो बार नहीं बल्कि चार बार सरकार बनाई। मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती अपने दूसरे और तीसरे कार्यकाल के दौरान सहारनपुर की हरौड़ा विधानसभा सीट से विधायक थीं।

मायावती पहली बार साल 1996 में हरौड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं। इस चुनाव में मायावती को 84,647 वोट मिले और उन्होंने 27,418 वोटों के मार्जिन से सपा प्रत्याशी विमला राकेश को हराया। इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।

इसके बाद साल 2002 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने एक बार फिर हरौड़ा विधानसभा सीट पर जीत हासिल की। इस बार मायावती को 70,800 वोट मिले और उन्होंने सपा की विमला राकेश को 28,901 वोटों से हराया। हरौड़ा विधानसभा सीट साल 2008 के परिसीमन में समाप्त हो गई।

हरौड़ा (SC) विधानसभा में मायावती की जीत
2002 विधानसभा चुनाव
417 – हरौड़ा (SC)
मायावती
BSP
84,647
कुल वोट
49.57%
वोट शेयर
27,418
जीत का अंतर
1996 विधानसभा चुनाव
401 – हरौड़ा (SC)
मायावती
BSP
70,800
कुल वोट
47.76%
वोट शेयर
28,901
जीत का अंतर

बीएसपी ने मायावती के लिए हरौड़ा को क्यों चुनाव?

सहारनपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल बताते हैं कि यूपी वेस्ट में कांशीराम और मायावती काफी पहले से एक्टिव थे। मायावती 1987 में हरिद्वार सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी थीं। तब हरिद्वार यूपी का हिस्सा था और इसमें सहारनपुर की दो विधानसभा सीटें शामिल थीं। मायावती इस चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं। उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन बीएसपी को जमीन पर आने वाले सालों में इसका फायदा मिला।

सुरेंद्र सिंघल के अनुसार, दलित राजनीति के लिए लिहाज से यह क्षेत्र कितना महत्वपूर्ण था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राम विलास पासवान भी साल 1987 के हरिद्वार लोकसभा उपचुनाव लड़े थे। हालांकि सफलता उन्हें भी नहीं मिली। सहारनपुर लोकसभा सीट से साल 1998 के उपचुनाव में बसपा के संस्थापक कांशीराम ने भी चुनाव लड़ा था।

मायावती के हरौड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की एक बड़ी वजह इस विधानसभा की डेमोग्राफी भी है। यहां दलितों की करीब 20% आबादी है, इसके अलावा मुस्लिम वोट भी बहुत अच्छी तादाद में है। इसी वजह से यह सीट मायावती के चुनाव लड़ने के लिए बेहद उपयुक्त रही।

अभी क्या है सहारनपुर जिले में बसपा का हाल?

सहारनपुर जिले की कुल सात विधानसभा सीटें हैं। साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में जिले की सात विधानसभा सीटें में से बेहट और सहारनपुर देहात विधानसभा सीट पर सपा ने जीत दर्ज की जबकि अन्य पांच विधानसभा सीटों- नकुड़, सहारनपुर नगर, देवबंद, रामपुर मनिहारान और गंगोह में बीजेपी जीती। इससे पहले भी 2017 के विधानसभा चुनाव में सहारनपुर जिले में बसपा का खाता नहीं खुला था।

सहारनपुर में बसपा का क्यों हुआ बुरा हाल?

सहारनपुर जिले की हरौड़ा विधानसभा सीट ने कभी राज्य को मुख्यमंत्री दिया था। मायावती यहां से विधायक रहते हुए दो बार यूपी की सीएम बनीं तो फिर इस समय सहारनपुर जिले में बीसपी का बुरा हाल क्यों है? इस सवाल के जवाब में सुरेंद्र सिंघल कहते हैं कि बीएसपी के खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह उनके कैडर वोट माने जाने वाले जाटव और चमार मतदाताओं के बीच वोटों का विभाजन रहा।

उन्होंने बताया कि सहारनपुर के कई बीएसपी नेताओं का मानना था कि मायावती जाटव नेताओं को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। वह खुद जाटव बिरादरी से हैं। यही असंतोष सहारनपुर में बीएसपी के लगातार गिरते ग्राफ की सबसे बड़ी वजह है।

सुरेंद्र सिंघल ने बताया कि मायावती के बाद साल 2007 में बीएसपी के टिकट पर हरौड़ा विधानसभा से जीतने वाले जगपाल सिंह आज बीजेपी में हैं। इसके अलावा मायावती के एक और करीबी रविंद कुमार मोलू बीजेपी में हैं। ये दोनों दो बार के विधायक है। बीएसपी से राज्यसभा सांसद रहे ईशम सिंह भी कभी मायावती के करीबी हुआ करते थे। वह इस समय राजनीति से दूरी बना चुके हैं।

वह कहते हैं बीजेपी ने बीएसपी नेताओं के बीच इस असंतोष का फायदा उठाने की पूरी कोशिश की, जिसका सहारनपुर में उसे फायदा भी मिला। इसके अलावा मायावती का राजनीति में पहली की तरह एक्टिव न होना तो प्रदेशभर में उसे नुकसान पहुंचा ही रहा है। मुसलमान वोटरों ने भी इसी कारण बसपा से दूरी बना ली।

सहारनपुर में पिछले तीन विधानसभा चुनावों के परिणाम

क्रम संख्याविधानसभा विजेता पार्टी 2022विजेता पार्टी 2017विजेता पार्टी 2012
1बेहटसपाकांग्रेसबसपा
2नकुड़बीजेपीभाजपाबसपा
3सहारनपुर नगरबीजेपीसपाभाजपा
4सहारनपुर देहातसपाकांग्रेसबसपा
5देवबंदबीजेपीभाजपासपा
6रामपुर मानिहारानबीजेपीभाजपाबसपा
7गंगोहबीजेपीभाजपाकांग्रेस

हरौड़ा सीट का अभी क्या है हाल?

साल 2008 में परिसीमन में हरौड़ा विधानसभा सीट खत्म हो गई। इस सीट में आने वाला क्षेत्र वर्तमान में सहारनपुर देहात विधानसभा सीट का हिस्सा है। साल 2012 में जहां सहारनपुर विधानसभा सीट पर बीएसपी के जगपाल ने जीत हासिल की तो वहीं 2017 में यह सीट कांग्रेस के मसूद अख्तर के हिस्से हाई। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां सपा के आशू मलिक जीते।

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मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि 2007 की तरह पूरी ताकत से चुनाव लड़ना होगा और ‘हाथी पर बटन दबाना है, सत्ता में वापस आना है’ मिशन को सफल बनाना होगा। पूरा लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें