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“जय श्री राम और अम्बेडकर मुर्दाबाद के नारे लगाते जुलूस निकाल रहे थे, टोकने पर मारपीट-आगजनी करने लगे”

मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 9 एफआईआर दर्ज की हैं और 160 नामदज लोगों में से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Author May 8, 2017 11:10 AM
शब्बीरपुर गांव के घरों आगजनी के बाद सामान अपना इक्ट्ठा करती बुजुर्ग महिला। (Express Photo)

सहारनपुर में दो समुदायों के बीच दो हुई हिंसक झड़क के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 9 एफआईआर दर्ज की हैं और 160 नामदज लोगों में से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया की नौ में से तीन एफआईआर ठाकुरों की शिकायत पर दर्ज की हैं, जबकि चार एफआईआर दलितों की शिकायत पर दर्ज की हैं। इसके अलावा एक-एक प्राथमिकी बडगांव स्टेशन ऑफिसर एमपी सिंह और घायल हुए एक हिन्दी अखबार के पत्रकार की शिकायत पर दर्ज की है। प्राथमिकी में हत्या, हत्या की कोशिश, आगजनी, दंगा, महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इनमें से एक प्राथमिकी ठाकुर समुदाय के सुमित कुमार की हत्या के आरोप में दर्ज की गई है। एफआईआर में कहा गया है कि जब दलितों ने सुमित को देखा तो चिल्लाए “ये राजपूत है, मारो इसे। और ऐसा कहकर उन्होंने सुमित पर पत्थरों से हमला कर दिया।” ठाकुरों की ओर से की गई दो अन्य एफआईआर में से एक गन्ना विक्रेता की है और दूसरी सब्बीरपुर गांव के निवासी की है। इन दोनों ने ही दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए हैं। वहीं, दलितों ने अपनी शिकायत में जाति को गाली देने, महिलाओं का उत्पीड़न, घरों को जलाने व लूटने के आरोप लगाए हैं।

दलितों की एक एफआईआर में कहा गया है, “राजपूत समुदाय के लोग जुलूस निकाल रहे थे। उनके हाथों में तलवारें थी और वो ‘जय श्री राम’ व ‘अंबेडकर मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। जब हमने उन्हें ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने बाबा रविदास की मूर्ती तोड़ दी, हमारे घरों को लूटा, महिलाओं को प्रताड़ित किया, शब्बीरपुर और महेशपुर गांव में जानवरों को आग लगाई व दुकानों को लूटा।” वहीं, पत्रकार अशोक पुंडीर ने आरोप लगाया कि जब वह इस मामले को कवर कर रहे थे तो उनपर हमला किया गया। पत्रकार ने कहा, “दलितों ने मुझे मारने की धमकी दी और मुझे पीटा। मेरे सिर और सीने में चोट आई है। हमलावरों ने मुझसे 20 हजार नकदी, सोने की अंगूठी और मेरा कैमरा भी छीन लिया।”

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