वसुंधरा सरकार पर रिफाइनरी नहीं लगने देने का आरोप - Jansatta
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वसुंधरा सरकार पर रिफाइनरी नहीं लगने देने का आरोप

सचिन पायलट का आरोप है कि राजस्थान सरकार ने द्वेष की वजह से रिफाइनरी का मसला टाले रखा।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सचिन पायलट। (पीटीआई फोटो)

राजस्थान के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि रिफाइनरी को नहीं लगने देने के लिए बार-बार सर्वे का हथकंडा अपनाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से रिफाइनरी के लिए बार-बार सर्वे पर एतराज जताते हुए पूछा है कि रिफाइनरी के लिए वह कितने सर्वे कराएगी। प्रदेश में कांग्रेस शासन में बाड़मेर में रिफाइनरी लगने का फैसला हो गया था और इसका शिलान्यास हो गया था। लेकिन प्रदेश में शासन बदलने के साथ ही भाजपा सरकार ने रिफाइनरी का मसला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। बाड़मेर में कच्चे तेल के कुएं हैं, इसलिए पूर्व की गहलोत सरकार ने रिफाइनरी को प्रदेश के विकास के लिए अहम माना था। भाजपा सरकार ने इसे प्रदेश के लिए घाटे का सौदा करार देते हुए इस पर नए सिरे से विचार का फैसला किया था।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस मामले में प्रदेश की शर्तों के हिसाब से रिफाइनरी की स्थापना को मुद्दा बनाया हुआ है। कांग्रेस इस मामले में भाजपा सरकार के प्रति आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। पश्चिमी राजस्थान में तो ‘रिफाइनरी बचाओ संघर्ष समिति’ लंबे समय से आंदोलन कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि रिफाइनरी से बाड़मेर जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में विकास का नया आयाम जुड़ेगा। इसके लगने से बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार मिलेगा। गहलोत का कहना है कि सरकार चाहे जिससे रिफाइनरी लगवाए, उसे फौरन इस बारे में कदम उठाना चाहिए। रिफाइनरी की स्थापना में देरी के कारण प्रदेश के लोगों में सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी भी पनप रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने अब नए सिरे से इस मामले में वसुंधरा सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार बनते ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रिफाइनरी पर सवालिया निशान लगा कर अपनी मंशा जता दी थी। पायलट का आरोप है कि सरकार ने द्वेष की वजह से रिफाइनरी का मसला टाले रखा। कांग्रेस के दबाव में पीडब्लयूसी से सर्वे के नाम पर एक साल निकाल दिया। इस कंपनी की रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार कोई ठोस फैसला नहीं कर पाई और न ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया।

पायलट का कहना है कि सरकार रिफाइनरी के मामले में दुर्भावना रखती है, इसलिए एक बार फिर आइईएल कंपनी से सर्वे का बहाना कर इसे लंबित रखना चाहती है। पायलट का कहना है कि भाजपा, केंद्र और राज्य सरकार सिर्फ दिखावे के तौर पर निवेश और रोजगार को अपनी नीति का केंद्र बिंदु रखते हैं।

भाजपा सरकार का मुख्य एजंडा सरकारी व्यवस्था का निजीकरण करना है। प्रदेश में दो साल पहले ही रिफाइनरी का काम शुरू हो जाता तो अब तक युवाओं को रोजगार के कई अवसर मिल जाते। भाजपा युवाओं के साथ रोजगार के नाम पर सिर्फ छलावा कर रही है।

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