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राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे सचिन पायलट, बीबीसी के दिल्ली दफ्तर से शुरू किया था करियर

सचिन पायलट ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली से की और दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उन्होंने इसके बाद एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। अपने पिछले साक्षात्कार में सचिन पायलट ने कहा कि वो कॉर्पोरेट जगत में जाना चाहते थे।

rajasthan, rajasthan news, rajasthan latest newsकांग्रेस के बागी नेता सचिन पायलट, साथ में हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। (ANI)

कांग्रेस के बागी नेता और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने महज 42 वर्ष की उम्र में भारतीय राजनीति में बहुत कुछ हासिल किया है। उन्होंने एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के चलते राजनीति में प्रवेश किया जब साल 2000 में उनके पिता का निधन हो गया। तब सचिन पायलट महज 22 साल के थे। फिर वो कांग्रेस में शामिल हो गए और राजस्थान के दौसा से लोकसभा सांसद बने। यह वहीं सीट है जहां से उनके पिता ने पांच में से चार बार चुनाव जीता था। सचिन पायलट की मां रमा पायलट भी दौसा से सांसद थीं।

सचिन पायलट जब 26 वर्ष के थे जब उन्होंने अपना पहला चुनाव जीता था। पिता की विरासत ने उन्हें कांग्रेस और राजस्थान में एक अहम स्थान दिलाने में खासी मदद की। राजेश पायलट स्क्वाड्रन लीडर रैंक के एक फाइटर पायलट थे और राजनीति में आने से पहले 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में लड़े थे। राजेश पायलट का उपनाम ‘बिधूड़ी’ था जिसे बदलकर उन्होंने ‘पायलट’ रख लिया। जब राजेश पायलट जीवित थे, तब सचिन पायलट ने ऐसी कोई इच्छा व्यक्त नहीं की कि वो राजनीति में शामिल होंगे। सचिन पायलट की इच्छा थी कि वो भारतीय वायु सेना में शामिल हों, मगर बाद में पता चला कि उनकी नजर कमजोर थी। हालांकि बाद में वो प्रादेशिक सेना में शामिल हो गए और ‘गुप्त रूप से’ विमानों को उड़ाने का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया।

आपको बता दें कि सचिन पायलट ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली से की और दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उन्होंने इसके बाद एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। अपने पिछले साक्षात्कार में सचिन पायलट ने कहा कि वो कॉर्पोरेट जगत में जाना चाहते थे। दिलचस्प है कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने पत्रकारिता भी की। उन्होंने बीबीसी न्यूज के दिल्ली ऑफिस में एक प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में काम भी किया। उन्होंने छोटी अवधि के लिए अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स के लिए भी काम किया।

हालांकि सचिन पायलट जब राजनीति में शामिल हो गए तब उन्होंने अपने पिता नक्शेकदम पर चलने की कोशिश की ताकि जनता से जुड़ सकें। पिता राजेश पायलट की तरह सचिन पायलट को भी राजनीति के शुरुआती दिनों में जन संपर्क यात्राओं के दौरान खुद कार चलाते हुए देखा जाता था।

उल्लेखनीय है कि महज 32 साल की उम्र में सचिन पायलट मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 केंद्रीय मंत्री बने। साल 2014 में 36 साल की उम्र में उन्हें अशोक गहलोत की जगह राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। चार साल बाद, सचिन पायलट के नेतृत्व वाली राजस्थान कांग्रेस ने राज्य के चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की। सचिन पायलट को उम्मीद की उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। मगर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बनाए गए।

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