Sachin Pilot Birthday: राजेश्‍वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी ऐसे बन गए थे राजेश पायलट, पिता की तरह सचिन भी करते हैं इस टाइटल का इस्तेमाल

Sachin Pilot Birthday : कांग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) का आज जन्मदिन है। उन्हें कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में शुमार किया जाता है।

Sachin Pilot Rajesh Pilot
राजेश पायलट (बाएं) सचिन पायलट (बाएं)। सोर्स- Rajesh Pilot Facebook Page and Indian Express

Sachin Pilot Birthday : कांग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) का आज जन्मदिन है। उन्हें कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में शुमार किया जाता है। राहुल गांधी के खास इनर सर्किल के सदस्य माने जाने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) न सिर्फ पिता की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं बल्कि उनके नाम के साथ लगे ‘पायलट’ शब्द को भी आगे बढ़ा रहे हैं। सचिन को ‘पायलट’ उपनाम अपने पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) से मिला है। दरअसल वह अपना पूरा नाम सचिन राजेश पायलट (Sachin Rajesh Pilot) लिखते हैं। राजेश पायलट का वास्तविक नाम राजेश्‍वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी था लेकिन राजनीति में उन्हें राजेश पायलट (Rajesh Pilot) के नाम से प्रसिद्धी मिली, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है।

राजेश पायलट बनने की कहानी: राजेश्‍वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी के राजेश पायलट बनने के पीछे की कहानी किताब ‘संजय गांधी, अपनी सबसे ताकतवर हैसियत में’ पढ़ने को मिलती है। किताब के अनुसार राजेश पायलट (Rajesh Pilot) ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलकर उत्तर प्रदेश के बागपत से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी जोकि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सीट मानी जाती थी। इंदिरा गांधी ने उन्हें यूपी में चुनाव लड़ने का मौका तो नहीं दिया लेकिन एक दिन उनके पास संजय गांधी के दफ्तर से फोन आया, जब वह वहां पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि आप राजस्थान के भरतपुर से पार्टी के उम्मीदवार चुने गए हैं।

परिवार की पहचान बना पायलट टाइटल: राजेश पायलट, राजनीति में आने से पहले भारतीय वायुसेना में पायलट पद पर थे। जब वह प्रचार अभियान में उतरे तो उनके लंबे नाम के बजाय ‘पायलट’ उपनाम से ज्यादा जाने लगा। धीरे धीरे वह इस नाम के साथ सहज होने लगे, जिसको देखते हुए नामांकन दाखिल होने से कुछ घंटों पहले संजय गांधी ने उन्हें राजेश पायलट (Rajesh Pilot) नाम रखने की सलाह दी। जिसको देखते हुए उन्होंने नामांकन के लिए दाखिल नोटरी में अपना नाम बदलवा दिया। इसके बाद से यही पायलट नाम उनका और उनके परिवार की पहचान बन गया।

पिता की तरह पायलट बनना चाहते थे सचिन: कांग्रेस नेता अपने पिता राजेश पायलट की तरह भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट ही बनना चाहते थे, उन्होंने प्रादेशिक सेना की ट्रेनिंग भी ली और पिता से छिपकर विमान उड़ाने का लाइसेंस भी हासिल कर लिया था लेकिन कमजोर आंखों के चलते वह इससे चूक गए थे।

26 की उम्र में देश के सबसे युवा सांसद बने सचिन पायलट: सचिन पायलट (Sachin Pilot) का राजनीति में आना भी तय नहीं था, वह एमबीए करने के बाद आगे की योजनाओं की तैयारी कर ही रहे थे कि उसी दौरान राजेश पायलट का एक हादसे में निधन हो गया। परिस्थिति ऐसी बनीं कि वह राजनीति में उतर गए और परिवार की परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए चुनाव के लिए नामांकन कर दिया। साल 2004 के लोकसभा चुनावों में वह दौंसा सीट से 1 लाख 20 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीते थे और मात्र 26 साल की उम्र में सांसद बन गए थे।

इन दिनों पायलट (Sachin Pilot) राजस्थान सरकार में चल रही उठा पटक के चलते सुर्खियों में रहते हैं। दिसंबर 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया था लेकिन अशोक गहलोत के साथ हुए मतभेदों की जानकारी बाहर होने के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है।

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