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राजस्थानः मायावती के भतीजे की मौजूदगी में बसपा दफ्तर में हंगामा, बुलाने पड़े बाउंसर

Rajasthan BSP: इस्तीफा देने वाले राजस्थान बसपा नेताओं ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पर पंचायत चुनावों में टिकट के बदले पैसा मांगने, मनमानी से टिकट देने और वरिष्ठ नेताओं से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।

राजस्थानः मायावती के भतीजे की मौजूदगी में बसपा दफ्तर में हंगामा, बुलाने पड़े बाउंसर
बीएसपी सुप्रीमो मायावती (एक्सप्रेस फोटो)

Rajasthan BSP: राजस्थान में आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी की आंतरिक कलह जगजाहिर हो गई है। पार्टी के दर्जनभर जिला कार्यकारिणी से जुड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। इन्होंने प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सामूहिक इस्तीफा दिया है। एक तरफ पार्टी आगामी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में जुटी है, तो दूसरी तरफ पार्टी नेताओं के इस्तीफे से पार्टी को झटका लगा है। हालांकि, प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम का कहना है कि इन नेताओं को पहले ही पदों से हटा दिया गया था।

रविवार को प्रदेश के कार्यालय में कार्यकारिणी की एक बैठक भी हुई, जिसमें रामजी गौतम और बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक और मायावती के भतीजे आकाश आनंद भी मौजूद थे। इस मीटिंग के दौरान प्रदेश कार्यालय में जमकर हंगामा हुआ और आक्रोशित बसपा नेताओं को बाउंसरों की मदद से पार्टी कार्यालय से बाहर निकाला गया।

इस्तीफा देने वाले नेताओं में जिला अध्यक्षों समेत विभिन्न कार्यकारिणी सदस्यों के नाम शामिल हैं। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने बसपा प्रदेश अध्यक्ष पर पंचायत चुनावों में टिकट के बदले पैसा मांगने, मनमानी से टिकट देने और वरिष्ठ नेताओं से भेदभाव का आरोप लगाया है। इसमें पार्टी नेताओं ने कहा कि 2008 में मौजूदा पंचायती राज राज्यमंत्री राजेंन्द्र सिंह गुढ़ा ने पार्टी को धोखा दिया। इसके बाद 2018 में उन्हें टिकट दिया और उन्होनें दोबारा धोखा दिया, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है।

राजस्थान विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने राज्य के लिए दो प्रभारी नियुक्त किए हैं, पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम और सुरेश आर्य। पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद भी राजस्थान में सक्रिय हैं। जून महीने में पार्टी ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 75,000 नए सदस्यों को जोड़ने के लिए राज्य में सदस्यता अभियान शुरू किया था।

सूत्रों की मानें तो, पार्टी 200 में से कम से कम 50 सीटों पर कड़ी मेहनत कर रही है। इससे पहले 2008 और 2018 के चुनाव में बसपा ने छह सीटें जीती थीं। दोनों ही मौकों पर उसके विधायक कांग्रेस में शामिल हुए। वहीं, 2003 में दो और 2013 में तीन सीटें जीती थीं।

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