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पतंजलि को जमीन अलॉट करने के बारे में दी थी सूचना, अब इंफॉर्मेशन अफसर ने छोड़ी नौकरी

उल्लेखनीय है कि बीते साल महाराष्ट्र सरकार ने 75 प्रतिशत डिस्काउंट देते हुए पतंजलि को नागपुर के मिहान इलाके में जमीन आवंटित की थी। यह जमीन महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलेपमेंट कंपनी की थी।

महाराष्ट्र सरकार ने पतंजलि को बेहद कम दाम में नागपुर में जमीन आवंटित की है। (Source: File/Reuters photo)

महाराष्ट्र सरकार द्वारा पतंजलि को नागपुर में जमीन आवंटित करने के मामले की सूचना देने वाले आरटीआई अफसर ने नौकरी छोड़ दी है। बता दें कि इस जमीन आवंटन में गड़बड़ी की बात सामने आयी थी। सूचना देने के कुछ समय बाद ही इस अधिकारी का तबादला नागपुर से मुंबई कर दिया गया था। अब खबर आयी है कि अधिकारी ने नौकरी ही छोड़ दी है। नौकरी छोड़ने वाले अधिकारी अतुल ठाकरे महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलेपमेंट कंपनी (MADC) में बतौर मार्केटिंग मैनेजर काम करते थे। उल्लेखनीय है कि बीते साल महाराष्ट्र सरकार ने 75 प्रतिशत डिस्काउंट देते हुए पतंजलि को नागपुर के मिहान इलाके में जमीन आवंटित की थी। यह जमीन महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलेपमेंट कंपनी की थी। इस सौदे पर आईएएस अधिकारी बिजय कुमार ने सवाल खड़े किए थे, जिसके तुरंत बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था।

इस मामले की जानकारी के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया ने आरटीआई के तहत MADC से जवाब मांगा था। काफी दिनों के इंतजार के बाद MADC ने आरटीआई का जवाब दिया था। यह जानकारी 2 पब्लिक इन्फोर्मेशन अधिकारियों (PIO) द्वारा दी गई थी। अतुल ठाकरे उन्हीं 2 अधिकारियों में से एक थे। दूसरे अधिकारी समीर गोखले थे। गौरतलब है कि आरटीआई का जवाब देने के कुछ दिन बाद ही अतुल ठाकरे और समीर गोखले का तबादला कर दिया गया था। मुंबई में तैनात समीर गोखले को नागपुर भेज दिया गया था और नागपुर में तैनात अतुल ठाकरे को मुंबई भेजा गया था। सरकार का इस मुद्दे पर कहना है कि अधिकारियों का तबादला रुटीन के तहत किया गया था और इसका पतंजलि से संबंधित आरटीआई से कोई संबंध नहीं था।

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हालांकि अतुल ठाकरे के नौकरी छोड़ने पर MADC के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें (अतुल ठाकरे) अच्छी जॉब मिल गई थी। उन्होंने डिपार्टमेंट से एनओसी की डिमांड की थी, जो उन्हें दे दी गई थी। वहीं एक अन्य आरटीआई कार्यकर्ता भास्कर प्रभु का इस पूरे मसले पर कहना है कि सूचना अधिकारियों को नियंत्रित करने के लिए ट्रांसफर एक टूल बन गया है। जिसकी मदद से सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया आरटीआई एक्ट बेअसर करने की कोशिश की जा रही है। अतुल ठाकरे ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि उनका प्रमोशन होने वाला था, लेकिन अचानक ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया।

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