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RSS से जुड़ी संस्था ने उठाई मांग- कोला जैसे सॉफ़्ट ड्रिंक युनिट्स बंद हों

स्वदेशी जागरण मंच ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव में कई उपाए भी सुझाए जिसमें शीतल पेयजल इकाइयों को बंद करना और जलाशयों एवं तालाबों के पुनर्जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना शामिल है।

Author नई दिल्ली | June 5, 2016 2:44 PM
कोका कोला (रॉयटर्स फोटो)

कई राज्यों के सूखे और पानी की गंभीर कमी का सामना करने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संस्थान ने कहा है कि सरकार या तो शीतल पेयजल इकाइयों पर नियंत्रण करे या उन्हें बंद करे क्योंकि ये पानी को बर्बाद कर रहे हैं। स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि सरकार को पास्थितिकी की कीमत पर विकास को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि तथाकथित विकास की बजाए जीवन महत्वपूर्ण है ।

मंच ने विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई पर ‘सख्ती से रोक’ लगाने की मांग की क्योंकि पारिस्थितिकी असंतुलन से मानवजाति को खतरा हो सकता है। स्वदेशी जागरण मंच ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव में कई उपाए भी सुझाए जिसमें शीतल पेयजल इकाइयों को बंद करना और जलाशयों एवं तालाबों के पुनर्जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना शामिल है।

भोपाल में हाल ही में बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि, ‘सरकार को समझना चाहिए कि तथाकथित विकास से अधिक जरूरी जीवन है।’ स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि जीवन के समक्ष खतरा उत्पन्न होने की परिस्थिति में मंच सरकार से आग्रह करता है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से गंभीरता से मुकाबला करने के लिए उसे कोका कोला, पेप्सी कोला और ऐसे ही शीतल पेयजल उद्योगों पर नियंत्रण करे या उसे बंद करे क्योंकि ये पानी को बर्बाद करते हैं।

मंच के सहसंयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि इन शीतल पेयजल इकाइयों के कारण स्थानीय आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि यह इलाके में पानी की कमी की स्थिति पैदा करते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं। संगठन ने कहा कि उसने पहले भी ऐसी इकाइयों को स्थापित करने का विरोध किया था क्योंकि इसका पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

महाजन ने कहा, ‘पर्यावरण चिंताओं के मुकाबले बड़े कारपोरेट हितों को तवज्जो दी जा रही है। ऐसे उद्योगों के कारण उत्पन्न पर्यावरण असंतुलन मानवजाति के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है।’ स्वदेशी जागरण मंच ने गन्ने और ऐसे ही अधिक पानी की जरूरत वाले फसलों पर भी नियंत्रण की मांग की।

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