मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाए जाएंगे आरएसएस के विचार, मेडिकल एथिक्स चैप्टर में शामिल किए गए हेगडेवार और दीनदयाल उपाध्याय

चैप्टर में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय के साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर, सर्जरी के पितामह आचार्य सुश्रुत और आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक के विचारों को भी शामिल किया गया है।

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मध्यप्रदेश आरएसएस और भाजपा विचारकों को मेडिकल के सिलेबस की लिस्ट में शामिल करने वाला पहला राज्य बन गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज में अब आरएसएस के विचार पढ़ाए जाएंगे। एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मेडिकल एथिक्स के चैप्टर में शामिल आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को पढ़ना होगा। मेडिकल के विद्यार्थियों के लिए यह विचार पढ़ना अनिवार्य है और इसके लिए कोई परीक्षा भी आयोजित नहीं की जाएगी।

दरअसल मेडिकल छात्रों के फाउंडेशन कोर्स में मेडिकल एथिक्स विषय शामिल होता है। इसे छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए पढ़ाया जाता है। हालांकि एमबीबीएस का कोर्स नेशनल मेडिकल काउंसिल के द्वारा तय किया जाता है। नेशनल मेडिकल काउंसिल हर सब्जेक्ट के टॉपिक को तय करती है। लेकिन टॉपिक के अंदर पढाए जाने वाले चैप्टर का चुनाव राज्य सरकार ही करती है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दिनों मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा फाउंडेशन कोर्स में शामिल मेडिकल एथिक्स के चैप्टर के चुनाव के लिए सुझाव मांगे गए थे। सुझाव देने के लिए एक कमेटी भी बनाई गई थी। कमेटी की अनुशंसा पर ही अलग अलग विचार और दर्शन को मेडिकल एथिक्स के चैप्टर में शामिल किया गया है। चैप्टर में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय के साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर, सर्जरी के पितामह आचार्य सुश्रुत और आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक के विचारों को भी शामिल किया गया है।

मध्यप्रदेश आरएसएस और भाजपा विचारकों को मेडिकल सिलेबस की लिस्ट में शामिल करने वाला पहला राज्य बन गया है। सिलेबस में इन विचारकों को शामिल किए जाने के बाद अब मध्यप्रदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हर विद्यार्थियों को एक महीने तक अनिर्वाय रूप से इन विचारकों के विचार को पढ़ना होगा। सबसे बड़ी बात यह कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने छात्रों से इस विषय की कोई परीक्षा भी नहीं ली जाएगी।

दरअसल फाउंडेशन कोर्स में शामिल सभी टॉपिक को पढ़ना अनिवार्य होता है। यह मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लेने के तुरंत बाद पढाया जाता है। इसके लिए एक महीने तक कक्षाएं चलती हैं और साथ ही इनको अटेंड करना भी अनिर्वाय होता है। हालांकि इन सब्जेक्ट की कोई परीक्षा नहीं ली जाती है और ना ही इनके नंबर जुटते हैं। मेडिकल एथिक्स में शामिल इन विचारों को फाउंडेशन कोर्स फॉर अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम 2019 के अनुसार एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

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