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केरल में बड़ी तादाद में ट्रेनों से परिवार समेत पहुंच रहे रोहिंग्‍या, ‘सीक्रेट लेटर’ के बाद RPF अलर्ट

पत्र में उत्तर-पूर्व केरल रूट की 14 ट्रेनों की जानकारी भी दी गई है, जिनमें हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस, हावड़ा चेन्नई मेल, शालीमार-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस और सिलचार-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस और डिब्रुगढ़-चेन्नई एगमोर ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों से संदिग्ध रोहिंग्या केरल जा सकते हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

मदुरई, तिरुवनंतपुरम और पलक्कड़ के रेलवे विभागीय सुरक्षा आयुक्तों को एक गोपनीय पत्र भेजा गया है जिसमें बताया गया है कि ट्रेनों में भरकर भारी मात्रा में रोहिंग्या केरल पहुंच रहे हैं। इस पत्र के बाद आरपीएफ और केरल पुलिस अलर्ट हो बताई जा रही है। पत्र में कहा गया है कि म्यांमार के राखीने राज्य के एक जातीय जनजाति के लोग रोहिंग्या उत्तर-पूर्वी राज्यों से लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिये केरल के लिए सफर कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्र में कहा गया है, ”सभी रोहिंग्या अपनी परिवारों के साथ समूह में सफर कर रह हैं। अधिकारी और कर्मचारी आपके नियंत्रण में उनके बारे में संवेदनशील रहें। अगर वे ट्रेनों में पाए जाते हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली पुलिस को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा जाना चाहिए। पीसीएससी की जानकारी के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई की गई रिपोर्ट इस कार्यालय को भेजी जा सकती है।” पत्र में आरपीएफ के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के कार्यालय से पी सेतु माधवन के हस्ताक्षर हैं।

पत्र में उत्तर-पूर्व केरल रूट की 14 ट्रेनों की जानकारी भी दी गई है, जिनमें हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस, हावड़ा चेन्नई मेल, शालीमार-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस और सिलचार-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस और डिब्रुगढ़-चेन्नई एगमोर ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों से संदिग्ध रोहिंग्या केरल जा सकते हैं। इनमें से कई ट्रेनें प्रवासी गलियारे के रूप में जानी जाने वाली जगह से चलती हैं, जहां काम की तलाश में असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार से दक्षिणी राज्यों में रोजाना भारी संख्या में मजदूरों का जाना देखा जाता है। पत्र की सत्यता की पुष्टि की जा चुकी है और आरपीएफ कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस दोनों ने रोहिंग्याओं के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए कमर कस ली है।

अब तक इस मामले कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है। आरपीएफ के पत्र में कही गई बातें गृह मंत्रालय की खुफिया सूचनाओं से मेल खाती लग रही हैं। इस बात की आशंका है कि अगर रोहिंग्या केरल में प्रवासी आबादी में मिल गए तो उनकी पहचान कर पाना मुश्किल होगा। 2013 के एक अध्ययन में कहा गया था कि राज्य आसानी से अन्य राज्यों के 25 लाख अतिथि श्रमिकों की मेजबानी करता है।

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