उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जयंत चौधरी को बड़ा झटका लगा है। जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) पार्टी के यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने शुक्रवार को अपने पद और पार्टी, दोनों से इस्तीफा दे दिया। प्रदेश अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक सात महीने दिया है, इस कारण जयंत के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
पूर्व एमएलसी रामाशीष राय ने कहा कि उन्होंने सत्ताधारी BJP के नेतृत्व वाले NDA की बांटने वाली राजनीति के कारण यह इस्तीफा दिया है। जानकारी दे दें कि RLD प्रदेश और केंद्र दोनों जगह NDA सरकार का हिस्सा है।
जाति और धर्म के आधार पर बांटने का चलन बढ़ा- रामाशीष राय
स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी को लिखे एक पत्र में राय ने कहा कि लोकतंत्र पर प्रभावशाली और आर्थिक रूप से ताकतवर वर्गों का कब्जा हो रहा है और समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों के कारण आम लोगों में परेशानी बढ़ रही है।
रामाशीष राय ने लिखा, “दुर्भाग्य से सार्वजनिक जीवन में ऊंचे पदों पर ऐसे लोग भी हैं जो सामाजिक बंटवारे और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं। यह चलन लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय हित के लिए खतरा है।”
अटल बिहारी की आशंका हो रही सच- पूर्व एमएलसी
पत्र में आगे लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति और चुनावों में पैसे के असर को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था। पूर्व एमएलसी ने कहा, “उनकी (वाजपेयी की) आशंकाएं आज काफी हद तक सच साबित हो रही हैं। विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता के बजाय राजनीति में आर्थिक ताकत और परिवारवाद का असर बढ़ रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है और यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए चिंता का विषय है।”
आरएलडी लीडरशिप से नाराज हैं रामाशीष
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए रामाशीष राय ने कहा कि वह RLD लीडरशिप से नाराज हैं क्योंकि वह एनडीए सरकार के हर फैसले का समर्थन कर रही है, जिसमें उसकी बांटने वाली राजनीति भी शामिल है। रामाशीष राय ने आरोप लगाया, “आज भाजपा एक कॉर्पोरेट संस्था बन गई है जो जाति और धर्म के आधार पर उन्माद फैलाकर समाज को बांट रही है और RLD एक पिछलग्गू की तरह इसका समर्थन कर रही है।”
जंतर-मंतर प्रदर्शन में गए थे रामाशीष
पिछले महीने वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर गए थे, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्र और युवा पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को भी समर्थन दिया था, जब वह सीजेपी की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे थे।
रामाशीष राय ने कहा, “पिछले महीने जंतर-मंतर पर जो हुआ, उससे मेरी अंतरात्मा को ठेस पहुंची। मैं स्टूडेंट्स की मांगों से सहमत हूं।”
2024 में एनडीए का हिस्सा बने थे जयंत
जयंत चौधरी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फरवरी 2024 में विपक्षी INDIA गठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे। 9 फरवरी 2024 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व PM चौधरी चरण सिंह, जयंत के दादा को भारत रत्न देने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, RLD प्रमुख ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, “दिल जीत लिया”। तब उनसे पूछा गया था कि क्या वह भाजपा से हाथ मिला रहे हैं, तो उन्होंने कहा था, “देखिए कोई कसर रहती है? आज मैं किस मुंह से इनकार करूं आपके इस सवाल को?”
2024 के लोकसभा चुनाव में, RLD ने यूपी में NDA के हिस्से के तौर पर चुनाव लड़ा और दो सीटें जीतीं। RLD दशकों से मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीत में सक्रिय है।
रामाशीष का राजनीतिक सफर
रामाशीष राय ने 1975 में JP आंदोलन से जुड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी की राज्य युवा शाखा के प्रमुख के तौर पर काम किया। उन्होंने 1993 के विधानसभा चुनाव में अपने गृह जिले देवरिया की फाजिल नगर सीट से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर उनके चुनाव को “सबोटाज” (नुकसान पहुंचाने) का आरोप लगाया।
2003 में भाजपा से निकाले गए
भाजपा ने 2003 में उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था, जब उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ उस समय के गठबंधन को खत्म करने की मांग को लेकर भाजपा बचाओ आंदोलन शुरू किया था।
बाद में रामाशीष कांग्रेस में शामिल हो गए और 2004 के लोकसभा चुनाव में देवरिया से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार गए। वे 2014 में भाजपा में लौट आए, लेकिन 2019 में फिर बागी हो गए जब उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिला।
आरएलडी में कब हुए शामिल?
वे 2021 में RLD में शामिल हुए और 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश पार्टी का प्रमुख बनाया गया। चूंकि रामाशीष पूर्वी यूपी से आते हैं, इसलिए जयंत ने उन्हें पूर्वांचल क्षेत्र में पार्टी का विस्तार करने के लिए राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया था। RLD का समर्थन आधार मुख्य रूप से पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय के बीच है।
RLD के सूत्रों ने बताया कि पार्टी को रामाशीष से ऐसे कदम की उम्मीद पहले ही थी, इसलिए पिछले महीने ही वरिष्ठ नेता अनुपम मिश्रा को राज्य पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
RLD के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) त्रिलोक त्यागी ने रामाशीष के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। त्रिलोक त्यागी ने कहा, “उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। RLD के साथ मिलकर NDA 2027 में यूपी में फिर से अपनी सरकार बनाएगा।”
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यूपी में जाट बेल्ट की पार्टी कहे जाने वाली रालोद राज्य में करीब-करीब हर बड़ी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी है। इस बार यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में रालोद किसके मिलकर चुनाव लड़ेगी, यह अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है लेकिन फिलहाल हालातों को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि अजित सिंह के वारिस केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को बीजेपी का साथ बेहद पसंद आ रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
