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बिहारः लालू का संदेसा ले चिराग से मिले रजक, बोले- BJP विरोधी गठबंधन की जरूरत

लंबे समय से बीमार चल रहे के आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय होते नज़र आ रहे हैं। कयास लगाए जा रहे है कि रजक लालू यादव का संदेशा लेकर चिराग से मिलने गए हैं।

आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक चिराग पासवान से मिलने पहुंचे। (social media/ twitter)

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) पार्टी के चाचा-भतीजा विवाद के बीच चिराग पासवान को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का लगातार साथ मिल रहा है। सोमवार को आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक उनसे मिलने पहुंचे। जिसके बाद बिहार के सियासी गलियारों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई हैं।

लंबे समय से बीमार चल रहे के आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय होते नज़र आ रहे हैं। कयास लगाए जा रहे है कि रजक लालू यादव का संदेशा लेकर चिराग से मिलने गए हैं। लालू ने चिराग को बिहार में विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। वहीं, दूसरी तरफ आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह और शहाबुद्दीन के परिवार से मिले। इस मुलाकात के भी सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब दलित नेता भाजपा द्वारा तवज्जो नहीं दिए जाने के बाद अपने राजनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। रजक ने बताया कि पासवान ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से भी बात की है। कभी जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) नेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे और अब राजद में शामिल रजक ने कहा कि उन्होंने चिराग पासवान के घर जाकर उनसे जो मुलाकात की, वह ‘‘निजी’ थी, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि जब नेता मुलाकात करते हैं तो राजनीतिक बातचीत होती ही है।

राजद नेता ने कहा कि दलित और पिछड़ी जातियों के हित के लिए भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस को अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया है। पारस ने दिवंगत दलित नेता रामविलास पासवान के बेटे के खिलाफ अपनी पार्टी के चार अन्य सांसदों के साथ हाथ मिलाया है। इसके बाद ऐसा प्रतीत होता है कि युवा लोजपा नेता के लिए राजनीतिक विकल्प सीमित हो गए हैं।

राजद नेता चिराग पासवान के समर्थन में बोलते रहे हैं और उनसे बिहार में विपक्षी गठबंधन से हाथ मिलाने का आग्रह करते रहे हैं। भले ही चिराग के पास कोई विधायक नहीं है, लेकिन भाजपा से औपचारिक रूप से नाता तोड़ने और प्रतिद्वंद्वी खेमे में शामिल होने के उनके फैसले से उसे मनोवैज्ञानिक प्रोत्साहन मिलेगा।

बहरहाल, चिराग पासवान ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी वर्तमान प्राथमिकता अपनी पार्टी को मजबूत करना है और उन्होंने इस उद्देश्य के लिए राज्य में ‘‘आशीर्वाद यात्रा’’ शुरू की है। जमुई से सांसद चिराग ने अपनी पार्टी पर संकट के दौरान उनकी मदद नहीं करने के लिए भाजपा के खिलाफ नाराजगी अक्सर व्यक्त की है, लेकिन वे भाजपा नेतृत्व पर हमला करने से परहेज करते रहे हैं। लोजपा के छह लोकसभा सदस्य हैं और उनमें से पांच ने पारस को सदन में अपना नेता चुना है।

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