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रिटायर IAS को 47 साल की कानूनी जंग के बाद मिला गोल्ड मेडल, LLB में किया था टॉप

भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी अजीत सिंह सिंघवी ने कानून की स्नातक परीक्षा में उच्चतम अंक हासिल किए थे।

Author June 24, 2016 18:53 pm
राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति जेपी सिंघल के साथ रिटायर आईएएस अजीत सिंह सिंघवी (दाएं से दूसरे)। (Photo Source: Indian Express)

भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त 81 वर्षीय अधिकारी अजीत सिंह सिंघवी को आखिरकार राजस्थान विश्वविद्यालय से 47 साल की कानूनी लड़ाई लडने के बाद ‘कानून’ की स्नातक परीक्षा में 1969 में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक मिला। राजस्थान विश्वविद्यालय के मुताबिक भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी अजीत सिंह सिंघवी को गुरुवार (23 जून) राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति जेपी सिंघल ने एक सादे समारोह में स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र दिए। सिंघवी ने कानून की स्नातक परीक्षा में उच्चतम अंक हासिल किए थे। विश्वविद्यालय ने अंतिम वर्ष में हासिल अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की थी, जबकि सिंघवी ने उच्चतम अंक हासिल किए थे।

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राजस्थान प्रशासनिक सेवा से वर्ष 1979 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत हुए सिंघवी ने कानून की स्नातक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए परीक्षा परिणामों को पुन: जांचने और पुनर्निरीक्षण के लिये परिणामों को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत की ओर से सिंघवी की याचिका को स्वीकार करने के बाद विश्वविद्यालय ने स्वर्ण पदक प्रदान किया।

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बीकानेर की सिविल अदालत में उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय के परिणामों को चुनौती दी थी। अदालत ने 1975 में उनके पक्ष में निर्णय दिया, लेकिन स्वर्णपदक हासिल करने वाले विद्यार्थी सवाई सिंह ने सिंघवी के पक्ष वाले निर्णय के खिलाफ बीकानेर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती पेश की। इस अदालत ने भी निचली अदालत के निर्णय को उचित मानते हुए 1990 में सिंघवी के पक्ष में निर्णय दिया, जिसे सवाईसिंह ने राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

राजस्थान विश्वविद्यालय के वकील अशोक मारू ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 2003 में पूर्व अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। हालांकि सिविल अदालत में सिंघवी को न्यायिक प्रक्रियाओं के चलते डिग्री हासिल नहीं हो सकी।

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प्रवक्ता भूपेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि सिविल अदालत के फैसले को स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय ने सिंघवी को ही स्वर्ण पदक पाने का हकदार होने की बात स्वीकार कर ली थी, लेकिन जिस विद्यार्थी को पहले स्वर्ण पदक दिया जा चुका था, उसने अदालत के निर्णय को एडीजे की अदालत में चुनौती देने के वजह से मामला कानूनी प्रक्रियाओं में उलझ गया था। सिंघवी ने स्वर्ण पदक हासिल करने में 47 वर्ष लगे।

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