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विधानसभा सचिव प्रसन्ना कुमार सूर्यदेवरा को पद पर बने रहने का प्रस्ताव पारित

दिल्ली विधानसभा के सचिव प्रसन्ना कुमार सूर्यदेवरा को अपने पद पर जमे रहने देने का प्रस्ताव सदन में शुक्रवार को पारित होते ही दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच सीधे टकराव का नया विवाद शुरू हो गया है।

Author नई दिल्ली | September 10, 2016 1:04 AM

दिल्ली विधानसभा के सचिव प्रसन्ना कुमार सूर्यदेवरा को अपने पद पर जमे रहने देने का प्रस्ताव सदन में शुक्रवार को पारित होते ही दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच सीधे टकराव का नया विवाद शुरू हो गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने इस साल 29 अगस्त को विधानसभा सचिव को अपने पैतृक विभाग प्रसार भारती में तत्काल प्रभाव से जाने का निर्देश दिया है। उस निर्देश का दिल्ली विधानसभा सचिव सूर्यदेवरा ने पालन नहीं किया और अपने पद पर बने हुए हैं। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने भी दिल्ली के उपराज्यपाल को अपने दायरे में रहकर काम करने को लेकर एक सख्त पत्र भेजा है। उस मसले और गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भाजपा की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में शुक्रवार को चर्चा हुई।

आप की विधायक अलका लांबा ने विधिवत रूप से निर्वाचित विधानसभा को निष्क्रिय बनाने के कथित असंवैधानिक प्रयासों के बाबत चर्चा का प्रस्ताव सदन में रखा। इस प्रस्ताव पर अलका लांबा, नितिन त्यागी, विजेंद्र गुप्ता, सोमनाथ भारती और विधानसभा अध्यक्ष ने भी अपने विचार रखे। सत्ता पक्ष के विधायकों ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल को विधानसभा के मामलों में दखलंदाजी करने का कोई भी अधिकार नहीं है। इस सदन को कमजोर करने का यह एक राजनीतिक प्रयास है। विधायकों ने कहा कि सचिव प्रसन्ना बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे 12 साल से लोकसभा और राज्यसभा के अलावा विधानसभा का कार्य देख रहे हैं।

विधायकों ने कहा कि 12 साल से प्रसार भारती को प्रसन्ना की याद नहीं आई और अब एकाएक उन्हें अपने विभाग में लौटने के लिए कहा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि सरकार ने सचिव प्रसन्ना को आगामी दो साल तक का विस्तार दिया है, जिससे वे अपने मौजूदा पद पर बने रहें। उन्होंने उपराज्यपाल नजीब जंग को कहा कि उन्हें विधानसभा के मामलों में नहीं बोलना चाहिए। आप के कई विधायकों ने कहा कि विधानसभा की एक कमेटी उपराज्यपाल को ही अपने समकक्ष बुलाने पर विचार कर रही है। उससे परेशान होकर मौजूदा सचिव प्रसन्ना को हटाया जा रहा है। मौजूदा सचिव अगर यहां से चले गए तो विधानसभा की मौजूदा कमेटियों पर उसका असर पड़ेगा।

आप विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। उपराज्यपाल इस सदन के मुखिया नहीं हैं। यह सदन एक सर्वोच्च संस्था है। उपराज्यपाल को उनकी सीमा बताई जानी चाहिए। उन्हें उनके अधिकार बताए जाने चाहिए। सदन में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अगर किसी भी अधिकारी को उनके पैतृक विभाग में बुलाया जाता है, तो उसे उस विभाग में जाना चाहिए। विधानसभा सचिव को 29 अगस्त को ही प्रसार भारती में चले जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि आप सरकार एक अधिकारी की नौकरी छीनने की कोशिश में लगी है। गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि सदन सर्वोपरि है और सदन चाहता है कि मौजूदा विधानसभा सचिव अपने पद पर बने रहें, तो उन्हें उनके पद पर बने रहने देना चाहिए। सत्ता पक्ष के सोमनाथ भारती ने विधानसभा सचिव को अपने पद पर बने रहने देने के बाबत प्रस्ताव सदन में रखा, जिसे विपक्ष के विरोध के बावजूद सदन ने पास कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में वे लोकसभा अध्यक्ष और अन्य राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों से मिलकर समर्थन जुटाएंगे।

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