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दिल्ली में अनधिकृत कालोनियों के निवासी 16 दिसंबर से कर सकेंगे संपत्ति के पंजीकरण का आवेदन

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस पद्धति से 500 कालोनियों का सीमांकन कर इनमें से 40 कालोनियों के नक्शे शनिवार को शुरु किये गये डीडीए के पोर्टल पर अपलोड कर दिये गये हैं। अपलोड किये गये नक्शे देखकर स्थानीय लोग और कालोनी की आरडब्ल्यूए 15 दिन के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां डीडीए को देकर शंकाओं का समाधान कर सकेंगे।

Author नई दिल्ली | November 23, 2019 7:03 PM
अनधिकृत कालोनियां (फाइल फोटो)

दिल्ली की 1731 अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया के तहत इन कालोनियों के निवासी अपनी संपत्ति का पंजीकरण कराने के लिये 16 दिसंबर से आवेदन कर सकेंगे। आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिये इन कालोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन बनाया गया है। पुरी ने कहा कि कालोनियों का सीमांकन करने और प्रत्येक संपत्ति के नक्शे बनाने से लेकर संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिये दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने दो अलग वेबपोर्टल बनाये हैं।

पुरी ने कहा कि इनमें से एक पोर्टल पर कालोनियों के सीमांकन की प्रक्रिया शनिवार से शुरु कर दी गयी है। जबकि दूसरा पोर्टल संपत्तियों के पंजीकरण के लिये बनाया जा रहा है। पुरी ने सीमांकन के लिये बनाये गये वेब पोर्टल का उद्घाटन करते हुये बताया कि दूसरा पोर्टल 16 दिसंबर से शुरु करने का लक्ष्य तय किया है। इस पोर्टल पर इन कालोनियों के निवासी पंजीकरण के लिये आवेदन कर सकेंगे।

इस दौरान डीडीए के उपाध्यक्ष तरुण कपूर ने बताया कि अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने के लिये केन्द्रीय मंत्रिमंडल के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद जारी अधिसूचना में ही तय कर दिया गया है कि संपत्ति के पंजीकरण के लिये आवेदन करने के 180 दिन के भीतर आवेदक को पंजीकरण प्रमाणपत्र देना होगा। कपूर ने कहा कि पंजीकरण के लिये आवेदन सिर्फ आॅनलाइन ही किया जा सकेगा। कपूर ने कहा कि आवेदन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिये डीडीए अपने क्षेत्रीय कार्यालयों में 25 से 30 सहायता केन्द्र एक दिसंबर से शुरु कर देगा। इन केन्द्रों में लोगों को पंजीकरण की आवेदन प्रक्रिया को पूरा करने के लिये निशुल्क मदद की जायेगी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में मौजूद अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया में कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिये दिल्ली के उपराज्यपाल ने 20 दिसंबर को ऐसे 79 गांवों को शहरी क्षेत्र में घोषित कर दिया है। इसके अलावा अनधिकृत कालोनियों के जुड़ी जमीन पर भू – उपयोग में बदलाव से जुड़े मुकदमों को भी सरकार वापस लेगी , उपराज्यपाल जल्द ही इस आशय के फैसले की घोषणा कर देंगे।

पुरी ने कहा कि 23 अक्टूबर को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इन कालोनियों को तीन महीने में नियमित करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जनवरी के अंतिम सप्ताह तक नियमितीकरण की प्रक्रिया को पूरा कर दिया जायेगा और निर्धारित समयसीमा में संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जायेगी।
उन्होंने बताया कि इन कालोनियों को नियमित करने की राह में सबसे बड़ी बाधा कालोनियों के सीमांकन की थी। पुरी ने पिछले 11 साल से यह काम लंबित होने के लिये दिल्ली की वर्तमान और पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि कालोनियों का सीमांकन कर इनके नक्शे बनाने का काम सर्वे आॅफ इंडिया की मदद से उपग्रह मैपिंग द्वारा किया जा रहा है।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस पद्धति से 500 कालोनियों का सीमांकन कर इनमें से 40 कालोनियों के नक्शे शनिवार को शुरु किये गये डीडीए के पोर्टल पर अपलोड कर दिये गये हैं। अपलोड किये गये नक्शे देखकर स्थानीय लोग और कालोनी की आरडब्ल्यूए 15 दिन के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां डीडीए को देकर शंकाओं का समाधान कर सकेंगे।

पुरी ने कहा कि समूची प्रक्रिया की निगरानी मंत्रालय द्वारा की जा रही है , जिससे लोगों को संपत्ति का स्वामित्व अर्जित करने में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े और भविष्य में कानूनी विवादों से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि मंत्रालय पूरी प्रक्रिया की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट भी सार्वजनिक करेगा।
यमुना खादर क्षेत्र , पुरातत्व विभाग और वन विभाग की जमीन पर बसीं कालोनियों को नियमित करने के सवाल पर पुरी ने कहा कि फिलहाल कानूनी बाधाओं के कारण इन कालोनियों के बारे में कोई फैसला नहीं किया गया है।

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