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अर्णब गोस्‍वामी का दावा- पालघर ल‍िंच‍िंग के श‍िकार साधुओं को बचाने के बजाय वीड‍ियो बना रहे थे पुल‍िसवाले

16 अप्रैल की रात महाराष्ट्र के पालघर जिले में मौजूद गढ़चिंचली गांव में ग्रामीणों ने कार सवार तीन लोगों पर पत्थर, डंडों से हमला कर दिया था।

Republic TV, Arnab goswami, Palghar lynchings, policeman making videos, monks lynchingsग्रामीणों ने इन लोगों पर हमला बच्चा चोरी और अंग तस्करी के शक के चलते किया था। (फाइल फोटो)

पालघर में 2 साधु और एक ड्राइवर की लिंचिंग के मामले में अर्णब गोस्वामी ने दावा किया है कि उस रात पुलिसवाले साधुओं को बचाने की बजाय उनकी पिटाई का वीडियो बना रहे थे। अर्णब ने एक वीडियो के माध्यम से बताया कि कैसे एक पुलिसावाला किसी तरह साधु को खुद से अलग करके एकदम से किनारे हो जाता है। वह आगे कहते हैं कि अरे उद्धव सरकार उद्धव जी अरे आदित्य ठाकरे देखो इसको। पुलिस वाला साधु को भीड़ के बीच छोड़कर अलग खड़ा हो जाता है। भीड़ के बीच दो साधु फंस जाते हैं। एक संत थोड़ी देर तक बैठे रहते हैं। उनके ऊपर लाठियों की बौछार होने लगती है। थोड़ी देर में वो गिर जाते हैं।

वीडियो में आगे अर्णब पूछते हैं कि इस स्वर में सबसे अफसोस जनक क्या है दोस्तो। सबसे अफसोस की बात क्या है। सबसे पीड़ा देने वाली बात क्या है? सबसे दुख देने वाली बात ये है कि वर्दी पहनकर वहां खड़े पुलिसवालों ने अपना फर्ज नहीं निभाया और तमाशबीन बन गए, लेकिन इससे भी ज्यादा अफसोस की बात ये है दोस्तो महाराष्ट्र की उद्धव सरकार सोनिया सेना सरकार शरद पवार की सरकार ने संतो को न्याय दिलाने के लिए कुछ भी नहीं किया।

ऊपर से महाराष्ट्र सरकार की सीआईडी ने जो चार्जशीट सौंपी उसमें साजिश को दबाने की कोशिश की गई उसमें कहा गया कि पालघर में दो संतों की हत्या की वजह अफवाह थी अफवाह। अफसोस की बात यह है कि साधुओं की हत्या के समय 2000 लोगों की भीड़ थी लेकिन पूछताछ के लिए सिर्फ 800 लोगों को बुलाया गया चार्ट शीट में सिर्फ आरोपियों का पक्ष रखा गया। संतों का पक्ष नहीं रखा गया और जो चार्जशीट दाखिल हुई वो सीआईडी से ज्यादा सोनिया सेना की चार्जशीट लग रही थी।

आपको बता दें कि 16 अप्रैल की रात महाराष्ट्र के पालघर जिले में मौजूद गढ़चिंचली गांव में ग्रामीणों ने कार सवार तीन लोगों पर पत्थर, डंडों से हमला कर दिया था। हमले का शिकार हुए तीन लोगों में दो साधु और एक ड्राइवर शामिल था। तीनों पालघर के रास्ते सूरत में एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। ग्रामीणों ने इन लोगों पर हमला बच्चा चोरी और अंग तस्करी के शक के चलते किया था।

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