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दिनेश शाक्य की रिपोर्ट : मृतकों व भूमिहीनों में बांट दिया मुआवजा

जिले में ओलावृष्टि का मुआवजा मरे हुए लोगों और भूमिहीनों तक को दे दिया गया है। ओलावृष्टि चैक धांधली मामले में 180 ऐसे लोगों को चैक दिए गए हैं जिनके नाम खतौनी में नहीं हैं।

Author इटावा | Published on: June 12, 2016 12:41 AM
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

जिले में ओलावृष्टि का मुआवजा मरे हुए लोगों और भूमिहीनों तक को दे दिया गया है। ओलावृष्टि चैक धांधली मामले में 180 ऐसे लोगों को चैक दिए गए हैं जिनके नाम खतौनी में नहीं हैं। ग्राम लेखपालों की पांच सदस्यीय टीम ने इटावा के चकरनगर इलाके के बंशरी ग्राम पंचायत में पहुंच कर जांच पड़ताल की। यहां ग्रामीणों ने नौ मरे हुए व्यक्तियों और करीब 180 भूमिहीनों को लेखपाल द्वारा फर्जी तरीके से चेक बनाने का आरोप लगाया। इस संबंध में उप जिलाधिकारी चकरनगर ने बैकों से मरे हुए व्यक्तियों के खाते खोलने और चेक भुनाने की जानकारी मांगी है।

चकरनगर के उपजिलाधिकारी आइएएस अक्षत त्रिपाठी ने बताया कि नौ मृत लोगों के खाता खोल कर उसमें से धन निकालने की जानकारी बैंकों से मांगी गई है। इसमें सर्वाधिक गड़बड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं में मिली है। गांव में 711 लाभार्थी थे। जांच के दौरान 180 लोग ऐसे मिले हैंं जिनके नाम खतौनी में दर्ज नहीं हैं। इसकी जांच कराई जा रही है। लेखपाल व खाता खुलवाने वालों से जवाब मांगा गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चकरनगर के थाना प्रभारी आनंद सिंह ने बताया कि एसडीएम स्तर पर उनको प्राथर्ना पत्र मिला है। इसमें साफ तौर पर इंगित है कि फ्राड करके बैंक खाता खुलवाने के बाद सूखा राहत को डकार लिया गया है लेकिन शनिवार होने के कारण जांच नहीं हो सकी है। लिहाजा सोमवार को बैंक जाकर जांच करने के बाद तथ्य जुटाए जाने के बाद कार्रवाई तय की जाएगी।

कालेश्वर महापंचायत के अध्यक्ष बापू सहेलसिंह सेंगर का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूखा और ओला पीड़ितों को सहायता दी लेकिन राजस्व विभाग के भ्रष्ट अफसरों ने वो धन भी डकार लिया। उन्होंने कहा कि एक समय डाकुओं के आंतक के चलते चंबल के बाशिंदों को नुकसान होता था। उनके खात्मे के बाद तैनात हुए अफसर भी किसी मायने में डाकुओं से कम नहीं है क्योंकि वो उन गरीबों की राशि को डकार रहे हैं जो सरकार ने उनको पेट भरने के लिए दी है। लिहाजा ऐसे अफसरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ओलावृष्टि के चेक वितरण मामले में ग्राम लेखपाल द्वारा व्यापक पैमाने पर की गई हेराफेरी की ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम पंचायत बंशरी में पांच सदस्यीय लेखपालों की टीम पहुंची। गांव के बाहर देवी मंदिर पर पहले से एकत्र ग्रामीणों ने ग्राम लेखपाल विशम्भर दयाल द्वारा करीब डेढ़ सौ भूमिहीनों और छह मृत लोगों को फर्जी तरीके से अधिक धन के चेक वितरण करने वालों के नाम जांच टीम को गिनाए। इसमें पिंकी पत्नी राधेश्याम अलुआ पुत्र बजारे खां, मेकत पुत्र सुन्दर लाल असर्फी पुत्र श्यामलाल, सखावत पुत्र सुन्दर लाल, वीरेन्द्र पुत्र मातादीन की करीब 20 साल पहले मौत हो चुकी है। इनके नाम चेक बनाए गए हैं। इनके खाते खोल कर चेकों को भुनवा भी लिया गया है।

बंशरी के रहने वाले जगराम ने बताया कि ग्राम पंचायत में करीब एक सैकड़ा लोग ऐसे हैं जिनके नाम सिर्फ पट्टा और जमीन का अता पता नहीं है। लेकिन लेखपाल ने पैसे लेकर उनके नाम पर भी 13 हजार रुपए का चेक बनाया है। उन्होंने बताया कि उनके पास से 36 बीघा जमीन है लेकिन मात्र एक हजार रुपए की ही चेक बनाया गया है। बंशरी गांव के बुजुर्ग भगवत दयाल ने बताया कि लेखपाल ने चेक बनाने के लिए पैसे मांगे थे। यदि वह लेखपाल को पांच हजार रुपए दे देते तो उनका भी चेक 13 हजार का बनाया जाता। पैसे नहीं दिए तो 42 बीघा का काश्तकार होने के बावजूद मात्र दो हजार रुपए का चेक दिया गया है।
उधर शांति देवी, शेर सिंह सुनहरी देवी, निशादेवी, रीता देवी, रानीदेवी, गुड़िया, राधादेवी, अनीता, सोनू व अखिलेश सहित करीब 180 नाम ग्रामीणों ने ऐसे बताए जिनके नाम कोई जमीन ही नहीं हैें। इसके बावजूद भी उन्हें 13-13 हजार रुपए के चेक दिए गए हैं। यही नहीं कुछ लोगों के नाम व उपनाम, तो कुछ लोगों की बंशरी और रावनी दोनों ग्रामों में तथा कुछ के प्लाटों पर भी चेक बनाए गए हैं। गांव के एक दलाल ने अपनी मां, पत्नी, भाई व अपने नाम दोनों गांवों में चेक बनवाए हैं। आखिर एक प्लाट, एक बीघा जमीन, मृतक और भूमिहीनों के नाम 13 हजार रुपए का चेक और जमीदारों के नाम सिर्फ एक हजार रुपए का चेक क्यों बनाए गए हैं।

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